राष्ट्रीय जनता दल की रैली के लिए भाकपा-माले का संदेश

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माननीय श्री लालू प्रसाद जी,

27 अगस्त को पटना में आयोजित राष्ट्रीय जनता दल की रैली में सीपीआई (एमएल) को आमंत्रित करने के लिए धन्यवाद. दुर्भाग्य से अपरिहार्य पहले की व्यस्तता के कारण मेरे लिए रैली के दिन पटना में रहना और उसमें शामिल होना संभव नहीं होगा. इस रैली में आए हुए सभी लोगों को मेरी हार्दिक बधाई और गर्मजोशी भरा अभिनंदन!

यह रैली एक ऐसे समय हो रही है जब बिहार का बड़ा हिस्सा भयावह बाढ़ की तबाही झेल रहा है, लेकिन दुखद यह है कि बाढ़ पीड़ितों को राहत देने के लिए जमीनी स्तर पर सरकार नाम की कोई चीज नहीं है. इसलिए अपनी पूरी ताकत के साथ बाढ़ पीड़ितों के पक्ष में खड़ा होना हम सबकी अतिआवश्यक जिम्मेदारी है.

केंद्र की मोदी सरकार देश और जनता के लिए एक बड़ी तबाही बनकर सामने आई है. संविधान के स्वतंत्रता, बराबरी और भाईचारे के केंद्रीय मूल्यबोध; सांप्रदायिक सद्भाव व गंगा-जमुनी संस्कृति की नींव और अपने रोजमर्रे की जिंदगी में सम्मान, समृद्धि, सामाजिक न्याय और लोकतंत्र के लिए चल रहे जनता के संघर्ष पर लगातार व केंद्रित हमले किए जा रहे हैं. काॅरपोरेट लूट और सांप्रदायिक नफरत का यह तालमेल एक आधुनिक लोकतांत्रिक भारत की अवधारणा के लिए अभूतपूर्व खतरा बन गया है. जनता का हर हिस्सा तमाम मोर्चों पर इसके खिलाफ संघर्षरत है. जनता के इस जोशीले प्रतिरोध को और तेज करने के लिए निश्चित रूप से हमें बढ़-चढ़ कर प्रयास करना चाहिए.

2015 में बिहार ने इस फासीवादी खतरे के खिलाफ जबरदस्त जनादेश दिया था. लेकिन पहले ही दिन से सामंती और सांप्रदायिक उन्माद की ताकतें इस जनोदश को चुनौती देने में व्यस्त थीं और अब वे सत्ता का अपहरण करने में कामयाब हो गयी हैं तथा बिहार को अपने सामंती-सांप्रदायिक एजेंडे की प्रयोगशाला में बदलने के लिए बेताब हैं. रानीसागर से डुमरा तक, पूरे बिहार में सांप्रदायिक उन्मादी गिरोहों द्वारा घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है. स्वच्छ भारत या शराबमुक्त बिहार के नाम पर दबे-कुचले व गरीब लोगों को हर जगह निशाना बनाया जा रहा है.

जिन लोगों ने भाजपा के खिलाफ महागठबंधन को बेहतर विकल्प समझते हुुए मतदान किया था, वे आज ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं. इस मौके पर उन सबसे हमारी अपील है कि वे अपना मनोबल न गिरने दें और इस राजनीतिक विश्वासघात का जवाबी प्रतिवाद करें तथा हर मोर्चे पर भाजपा-जेडीयू के अवैध शासन का जोरदार प्रतिरोध करें. बिहार उपनिवेशवाद और तानाशाही के खिलाफ हर लड़ाई में हमेशा अगले मोर्च पर रहा है तथा राजनीतिक गद्दारी की कोई भी ताकत बिहार को सामंती-सांप्रदायिक ताकतों की प्रयोगशाला में नहीं बदल सकता .

गर्मजोशी भरे अभिनंदन के साथ

दीपंकर भट्टाचार्य
महासचिव, भाकपा-माले