मौसम की बेरुखी ने चौपट की धान की फसल, दिवाली पर छाई किसानों में मायूसी

418
0
SHARE

दरभंगा – जब किसानों की फसलें लहलहाती हैं, तब उनकी खुशी का ठिकाना नहीं होता है. लेकिन वही लहलहाती फसल जब किसी कारण सूखने लगती है या बर्बाद हो जाती है, तब पुत्र शोक से कम गमजदा नहीं करती है. वर्तमान में इसी परिस्थिति से जूझ रहे हैं दरभंगा के किसान. सर पर कई त्योहार हैं लेकिन किसानों के घरों में मायूसी है.

दरअसल, किसानों ने जैसे-तैसे कर्ज लेकर धान की रोपनी की और अपने खेतो में तीन से चार बार पटवन किया. लेकिन मौसम की बेरुखी ने उनके सपने पर पानी फेर दिया. अब इनके खेतों की फसल सूख रही है. जून माह से अभी तक सामान्य से आधी बारिश होने के बावजूद पूरे जिले को सूखाग्रस्त क्षेत्र घोषित नहीं किया गया. कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक़ जून से अभी तक 980 मिलीमीटर वर्षा होनी थी। परंतु अभी तक मात्र 520 मिलीमीटर वर्षा हुई.

किसानों को अनुदान नहीं

आपदा विभाग के नियमानुसार 33 प्रतिशत से ज्यादा क्षति होने पर किसानों को अनुदान देने का प्रावधान है. जबकि यहां 90 प्रतिशत से ज्यादा धान की फसल सूख गयी है. बावजूद इसके अधिकारियों के गलत प्रतिवेदन के कारण पूरे जिले को सूखाग्रस्त घोषित नहीं किया जा सका. इसको लेकर यहां के किसानों के बीच काफी आक्रोश है. सूखे की मार झेल रहे अन्नदाता भोला यादव का कहना है कि वो बर्बाद हो गए हैं. उनके दुख-दर्द को कोई सुनने, देखने वाला नहीं है. धान की रोपाई कर किसान कर्ज में डूब गए हैं.

खेतों में दरारें किसानों का कहना है कि किसी तरह सिंचाई तो कर दिया. लेकिन बारिश न होने से खेतों में दरारें पड़ गई हैं. सारी फसल बर्बाद हो गई है, अब खेतों में खड़ी फसल को काट कर मवेशी को खिला रहे है. वहीं, जिला कृषि पदाधिकारी समीर कुमार ने बताया कि अभी 11 प्रखंडों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है और शेष सात प्रखंडों को सूखाग्रस्त घोषित करने के लिए सरकार को अनुरोध किया गया है.