डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने तेजस्वी को लगाई फटकार, कहा- इतनी दिक्कत तो ऐलान कर दें कि नहीं करेंगे वर्चुअल रैली

178
0
SHARE

PATNA: भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह रविवार 7 जून को डिजिटल रैली करेंगे जिसके माध्यम से पार्टी के नेता, कार्यकर्ता समेत अन्य लोगों से जुड़ेंगे. इस संबंध में बात करते हुए शनिवार को सूबे के डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने बताया कि सोशल मीडिया के जितने भी माध्यम है चाहे वो फेसबुक हो या ट्वीटर हो या अन्य जितने भी सोशल मीडिया के माध्यम हो उन सभी माध्यम से हम लोगों को जोड़ रहे हैं.

हमलोग ने लाखों लोगों को एक लिंक मैसेज किया है. उस लिंक को क्लिक करने के बाद वो अमित शाह का भाषण सुन सकेंगे. वहीं जहां आधुनिक तकनीक नहीं है वहां हम टेलीविजन और एलसीडी स्क्रीन की व्यवस्था कर रहे हैं और उस स्क्रीन पर मोबाइल से कनेक्ट कर भाषण प्रसारित किया जाएगा.

उन्होंने कहा कि ये जो हल्ला करते हैं कि लाखों करोड़ों खर्च होगा तो मैं बता दूं रैली आयोजन में लाखों खर्च होता है. लोगों को लाने से लेकर मंच की तैयारी,व्यवस्था आदि में. यह वर्चुअल रैली ऐसी रैली है जो लाख डेढ़ लाख रुपए से भी कम खर्च में लाखों लोग को संगठित कर सकती है. दरअसल, लोगों को परेशानी यह हो रही है कि बीजेपी की जो पहुँच है वो उनकी नहीं है.

उन्होंने बताया कि अभी लॉकडाउन के दौरान हमारे पार्टी के नेता प्रतिदिन ऑडियो या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये लोगो के साथ कम्युनिकेट करते हैं. ये ऑडियो वीडियो कोई नई चीज नहीं है. लेकिन इस लॉकडाउन में इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हुआ.

उन्होंने कहा कि कोई पार्टी अगर रैली कर रही है तो आप इसमें किस बात का विरोध कर रहे हैं पहले ये तो बताइये? ये तो कोई चुनावी रैली भी नहीं है, पार्टी के जो छः वर्ष पूरे हुए उसी को लेकर पूरे देश में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, नरेंद्र मोदी के संदेश को लेकर हम घर-घर जा रहे हैं. एक करोड़ लोगों तक हम उनके संदेश को पहुंचा रहे हैं. पार्टी ने पिछले छः साल में क्या किया और इस कोरोना के दौरान हमलोग ने गरीबों के लिए खाद्यान्न कैसे दिया, डीबीटी के माध्यम से पैसा कैसे ट्रांसफर किये गए, राज्य सरकार ने क्या किया इन्ही बातों को हम बता रहे हैं तो इसमे वो विरोध किस बात का कर रहे हैं और यहीं वो लोग हैं जब नरेंद्र मोदी ने कार्यक्रम आयोजित किया था थाली बजाने का और घन्टी बजाने का तो यही लोग मजाक उड़ा रहे थे और आज यहीं थाली बजा रहे हैं तो बजाए उससे कोई फर्क पड़ने वाला नहीं है या तो वो ऐलान कर दें कि राजद और कांग्रेस के लोग इस पूरे आने वाले तीन महीने के अंदर फेसबुक, ट्वीटर या अन्य किसी भी सोशल मीडिया का उपयोग नहीं करेंगे.

इन्ही के पिता लालू यादव ने आईटी को लेकर मजाक बनाया करते थे और ऐसा कर बिहार को 25 साल पीछे इन्होंने धकेल दिया जिस समय आईटी का बूम था और बैंगलोर से लेकर हैदराबाद से आईटी कंपनियां आ रही थी इनलोग ने मजाक बनाया जिसका परिणाम हुआ कि बिहार आईटी के क्षेत्र में पिछड़ गया.

तेजस्वी के सोशल मीडिया पर एक्टिव होने को लेकर कहा कि हमारी बनाई सड़को पर चलकर हमे ही गाली दे रहे हैं. आप एक तरफ सोशल मीडिया का विरोध कर रहे हैं वर्चुअल रैली का विरोध कर रहे हैं. आखिर वर्चुअल रैली क्या है ये तो हर पार्टी जो फेसबुक लाइव कर रही हैं वो भी तो वर्चुअल रैली ही है. तो ये कोई बड़ी बात नही है, ज़ूम का इस्तेमाल कर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का इस्तेमाल आज सारे लोग कर रहे हैं तो इसमे विरोध किस बात का राजद के लोग ऐलान कर दे कि अगले तीन से चार माह वो कोई वर्चुअल रैली नही करेंगे.

तेजस्वी के पोस्टर लगाने और लेटर फाड़ने को लेकर इनका कहना है कि इन सब से कुछ नहीं होगा, चुनाव जब भी हो हम अपनी उपलब्धियों के आधार पर लड़ेंगे. मुख्यमंत्री ने उस दिन कहा है कि हमने क्वारेंटिन सेंटर में रहने वाले लोगों पर 5 हजार तीन सौ रुपये प्रति व्यक्ति खर्च किया है आज उसका परिणाम है कि लोग क्वारेंटिन सेंटर में रहना चाहते हैं. केंद्र और राज्य सरकार दोनों ने मिलकर 20 हजार करोड़ रुपए से कम चाहे वो खाद्यान्न हो या डीबीटी के माध्यम से लोगों के खाते में पैसे ट्रांसफर का हो, केंद्र और राज्य दोनों ने मिलकर 20 हजार करोड़ केवल राहत के लिए हमलोग ने गरीबों को देने का काम किया है.

चेहरे को लेकर इनका कहना है कि बीजेपी ने तो तय कर दिया है इसमें इफ और बट का सवाल नहीं है और कल भूपेंद्र यादव ने भी दुबारा यही बातों को दुहराया है तो एक ही बात को बार-बार कहने की आवश्यकता नहीं है, बिहार में आधे दर्जन बार जेपी नड्डा जी ने भी कहा है तो देखिए युद्ध के दौरान कमांडर कभी बदला नहीं जाता है और एक बार जब कमांडर की घोषणा हो गई और जब नीतीश जी यहां से पिछले 15 से 20 वर्षो से हमलोग के कमांडर हैं तो चिराग ने क्या बयान दिया ये मुझे पता नहीं पर यह स्पष्ट तौर पर भूपेंद्र यादव जो बिहार के प्रभारी है उन्होंने फिर से वो बात दुहराया है.

सीट बंटवारे पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे, मुझे नहीं मालूम कि उन्होंने क्या ट्वीट किया है तो उनका क्या संदर्भ था इसका जवाब तो वहीं दे सकते हैं इस संबंध में मैं कोई टिप्पणी नहीं करूंगा.

तेजस्वी के चेहरा पर इनका कहना है कि अभी हमलोग संक्रमण से निपटने में लगे हैं, क्वारेंटिन सेंटर में जो लोग हैं उन्हें सुविधा देने में लगे हैं, जो कोरोना का बढ़ता हुआ संक्रमण है ग्रामीण क्षेत्रों में उससे हमलोग चिंतित हैं. इसलिए हमलोग का पूरा दिमाग इस समय इसी पर लगा है. जब चुनाव का ऐलान होगा तब सारी चीजों को देखेंगे इसलिए हम बिल्कुल ही फोकस होकर गरीबों की सेवा और मदद में लगे हैं, आज ही सौ करोड़ की लागत से चमकी बुखार वाले बच्चों के लिए अस्पताल का उद्घाटन किया गया. ये पिछले साल जून के महीने में चमकी बुखार से बड़ी संख्या में बच्चे मरे थे तो फिर ये बुखार न आये और अगर आये तो कैसे बच्चों को बचाया जाए. फिर बाढ़ की संभावना है 16 जून को मानसून इंटर कर जायेगा कभी भी बिहार में बाढ़ आ सकती है तो सरकार का पूरा ध्यान अभी इन्ही सब चीजों पर केंद्रित है और हमलोग तो वो लोग हैं जो साल भर पढ़ते हैं और परीक्षा की चिंता नहीं करते जब आ जाये हम तैयार है, तैयारी उनको करनी पड़ती हैं तो सालभर मटर गश्ती करते हैं जिन्होंने कुछ नहीं किया हो और जब परीक्षा नजदीक आती है तो 12 घन्टे पढ़ने लगते हैं.

मुझे अब लग रहा है चूँकि चुनाव आयोग ने तैयारी शुरू कर दी है बैठके बुलाने प्रारंभ कर दिया है और यह भी सुनने में आ रहा है कि ऑल पार्टी मीटिंग भी बुलाई जाएगी तो चुनाव आयोग के गतिविधियों से ऐसा लगता है कि समय पर बिहार में चुनाव होंगे.

उन्होंने कहा कि अभी मैं कोई सीट का दावा नही करूंगा, सीट के दावा का कोई मतलब भी नहीं है. हमने तो लोकसभा में 39 सीट जीती हैं. लोग चेहरे की क्रीडब्लिटी देखते हैं कि संकट में कौन खड़ा रहा, चमकी बुखार के समय कहां थे, पटना जब डूब रहा था तब कहाँ थे, कोरोना संक्रमण फैला तब कहाँ थे. उनके पूरे परिवार जिसको लालुवाद की परिभाषा वो देते हैं, हमने मार्क्सवाद सुना था, लेनिनवाद सुना था लेकिन लालुवाद नहीं सुना था और यहां तो लालुवाद का अर्थ अराजकता है यानी अंधेरा अपहरण तो इनकी क्या परिभाषा है. लालूवाद की और जिन गरीबों की बात करते हैं इनके राज में जब बाढ़ आते थे तो दो-दो महीने लोगों को 5 किलो गेहूं के लिए भी तरसना पड़ता था और आज लोगों को कितना अनाज मिल रहा है. इसलिए लोग चेहरे की विश्वनीयता और राजनीतिक दलों के वैचारिक आधार और जो काम किया है इसी आधार पर वोट देते हैं. इसलिए हमें वोट की चुनाव की चिंता नहीं हम काम करते हैं और करते रहेंगे और जब चुनाव का ऐलान होगा हम चुनावी मोड में आजाएंगे.