और ज़िंदगी की रेस हार गया डीएम पर सिखा गया सबक

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बक्सर डीएम मुकेश पांडे ने आत्महत्या करने से पहले एक वीडियो रिकॉर्ड किया था जिसमें उन्होंने ये बताने की कोशिश की है कि आत्महत्या करने वो क्यूं जा रहें हैं। ये वीडियो उन्होंने बक्सर के सर्किट हाउस में रिकॉर्ड किया है, जैसा कि वो वीडियो में खुद बताते हैं।

वीडियो को देखना, ये जानने के बाद कि इसमें जो शख्स है उसने दर्दनाक मौत को गले लगाया, आपकी रूह को झकझोर देता है। जहां एक-तरफ ये एहसास है कि इस इंसान को बचाया जा सकता था, वहीं इस बात पर रोष भी कि एक ऐसा व्यक्ति जो देश के सबसे कठिन परीक्षा में बेहतरीन रैंक लाता है, वो ज़िंदगी की परीक्षा में फिसड्डी सिद्ध होता है। माफ करिएगा मुझे ये कहना पड़ रहा है। मुझे डीएम मुकेश पांडे और उनके परिवार से बेहद सहानुभूति है पर मन में कई तरह के सवाल उमड़-घुमड़ कर सामने आ रहे हैं। परिवार जो समझ नहीं पा रहा था कि वे मानसिक रूप से कमजोर हो रहे थे और उन्हें मेडिकल परामर्श की आवश्यकता थी।

मैंने जब वीडियो देखा तो उनकी बातें सुनकर मुझे ये ही महसूस हुआ कि उनके दिल और दिमाग में कोई तालमेल नहीं था। एक-तरफ वो ये कह रहें हैं कि उनकी खुदकुशी की वजह उनके माता-पिता और पत्नी के बीच की तकरार थी तो दूसरी तरफ ये भी कह रहे हैं कि उनके और उनकी पत्नी की शख्सियत दो तरह की है जिससे उनकी शादीशुदा ज़िंदगी बेहद तनावपूर्ण रही है, हालांकि वे यह भी कहते हैं कि इन सब के बावजूद वो और उनकी पत्नी एक-दूसरे से बेहद प्यार करते हैं। पर इन सब से उलट जो बात गौर करने वाली है वो ये कि उन्हें लगता है कि मनुष्य का जीवन में कोई खास महत्व नहीं, यूनिवर्स की जर्नी देखें तो कई लोग आए और गए, हम रोज नए-नए जाल बुनते रहते हैं और अपने-आप को उलझाते रहतें हैं, हमारा कोई इम्पॉर्टेन्स नहीं। वे कहते हैं कि उन्हें इस बात की समझ हुई है कि मनुष्य का इस ब्रह्माण्ड में कोई अस्तित्व नहीं। पहले वे आध्यात्म, तप, समाज सेवा की तरफ जाना चाहते थे पर फिर उन्हें लगा कि ये भी व्यर्थ है और इससे अच्छा है कि इंसान अपनी मृत्यु को गले लगाए और अपने इस फालतू के जीवन का अंत करे।

मुकेश अंत में ये भी कहते हैं कि इस जीवन से उनका मन भर गया है। मुकेश की सभी बातों को सुनने के बाद लगता है कि उन्हें मदद की जरुरत थी, जरुरत थी एक हमदर्द की जो उन्हें ऐसी परिस्थिति से बाहर निकालता। उन्हें किसी मनोचिकित्सक की भी जरुरत थी पर चूंकि हमारे समाज में इसको लेकर इतनी शर्मिन्दगी है कि कोई इस चीज को मानना ही नहीं चाहता, लोग चुपचाप मर जाना कबूल कर लेते हैं।

पर जिस तरह से मुकेश के कई तरह के मैसेज सामने आए हैं, मालूम होता है कि मुकेश को उम्मीद थी कि कोई उन्हें बचा लेगा पर उनकी ये उम्मीद भी शायद टूट गई। क्या उनके तड़प को किसी ने गंभीरता से नहीं लिया? वे मरने से पहले वाट्सएप मेसेज भी करते हैं पर उनके करीबी उन्हें बचा नहीं पाते। पर सबसे बड़ी बात – आप इस दुनिया में नहीं हैं पर क्या आपकी बेटी का मासूम चेहरा भी आपको रोक नहीं पाया ? बेटी का बाप होना बड़ी जिम्मेदारी होती है, इस जिम्मेदारी से क्यूं मुंह मोड़ लिया? उसको क्यूं बदकिस्मत बना गए?

हमने बहुत सोचा कि लोगों के साथ डीएम मुकेश पांडे का वीडियो साझा करें पर शायद ये गैर-जिम्मेदाराना हरकत होती। हम नहीं चाहते कि कोई फिर ऐसी गैर-जिम्मेदार हरकत करे इसलिए वीडियो नहीं दिखाने का निर्णय लिया। हर खबर ब्रेकिंग न्यूज़ और एक्सक्लूसिव नहीं होती।