कैमूर जिले के सदर अस्पताल में डॉक्टर की लापरवाही

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कैमूर जिले के सदर अस्पताल भभुआ में एक हैरतंगेज मामला सामने आया है। जहां एक महिला ने नसबंदी का ऑपरेशन कराया और स्वास्थ्य विभाग द्वारा पीड़िता के खाते में दो हजार रुपये भी दिया गया लेकिन नसबंदी कराने के 20 दिन बाद ही पीड़ित महिला को उल्टी आने लगी और सर में चक्कर होने लगा। जिसके बाद पीड़िता ने जांच कराया तो उसे प्रेग्नेंट होने की बात बताई गई। पीड़िता ने इस बात की जानकारी जब अस्पताल में दिया तो सदर अस्पताल भभुआ ने अपना पल्ला झाड़ लिया। जब पीड़िता ने पैथोलॉजी सेंटर वाले से इसकी शिकायत की तो उसने पीड़िता से बच्चा को जन्म देने के लिए कहते हुए उसकी बोली लगा दी। उसने कहा कि बच्चा जन्म दे देने के बाद मुझे दे देना, उसके बदले मुझसे 20 हजार रूपये भी ले लेना। वहीं पीड़िता ने बताया कि मेरे पति ठेला चलाते हैं और पहले से मेरी चार बेटियां और एक बेटा है जिसका पालन-पोषण किसी तरह से होता है। उसके बाद हम लोगों ने नसबंदी कराने का फैसला लिया। उसके बाद सदर अस्पताल भभुआ में आशा कार्यकर्ता के साथ गई, जहां पर अस्पताल के डॉक्टर ने कुछ टेस्ट कराने के लिए प्राइवेट पैथेलोजी होम में भेज दिया। जहां जांच रिपोर्ट में सभी चीजें निगेटिव आया, इसके बाद सदर अस्पताल भभुआ के डॉक्टर ने मेरा नसबंदी का ऑपरेशन किया। ऑपरेशन कराने के 15-20 दिन बाद ही मुझे उल्टी और चक्कर आने लगी। तबजाकर मैं लोगों को बताइ। फिर जब टेस्ट कराई तो पता चला कि मुझे बच्चा होने वाला है । पीड़िता के साथ गई महिलाओं ने बताया कि जब पैथोलॉजी सेंटर पर हम लोग गए पीड़िता के साथ और कहा कि किस तरह से आपने जांच किया कि मुझे प्रेग्नेंट होते हुए भी सब रिपोर्ट नेगेटिव बताया। तो उसने कहा की तो क्या हुआ बच्चा मुझे दे देना और बीस हजार रूपया ले लेना । वहीं जिलाधिकारी राजेश्वर प्रसाद सिंह ने इसे संगीन मामला बताते हुए टीम गठित कर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।