ममता का आंचल

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मोतिहारी – सच हीं कहा गया है जाको राखे साईंया मार सके ना कोय। एक निर्दयी मां ने जहां इस मासूम को जन्म देने के बाद भी मारने की पूरी कोशिश की थी। लेकिन भगवान ने इस मासूम के बचा लिया। दुनिया में आते हीं एक मासूम की पहली किलकारी के साथ उसकी बदनसीबी भी साथ हीं आई। जन्म देने वाली मां ने गला दबाकर मारने का प्रयास करने के बाद मृत समझकर झाड़ी में फेंक दिया। लेकिन राहगीरों की नजर ने उस मासूम को नई जिन्दगी दिया। अब पूर्ण रुप से स्वस्थ होकर मासूम ममतामयी मां के आंचल की छांव के इंतजार में है। लेकिन मासूम पर अस्पताल के महिला सफाईकर्मी अपनी ममता उड़ेल रही है।

मोतिहारी सदर अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में एक महिला की गोद में अपनी नन्हीं आंखों से उसे निहार रही बच्ची मात्र बीस दिनों की है, जिसे जन्म लेने के साथ हीं उसकी मां ने मरने के लिए झाड़ियों में फेंक दिया था। लेकिन आज से 20 दिन पूर्व लोगों को झाडी से मिली इस बच्ची को सदर अस्पताल में इलाज के बाद नई जिन्दगी मिली है। चिरैया थाना के सेनवरिया गांव के ग्रामीणों ने झाडी से मासूम को बरामद किया। बच्ची बीमार थी, नतीजतन लोगों ने चिरैया के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में भर्ती करा दिया जहां से बेहतर इलाज और देखभाल के लिए मासूम को मोतिहारी सदर अस्पताल के नवजात शिशु वार्ड में भर्ती कराया गया। दुनिया में आँख खोलने के साथ विपत्ति की पहाड के बीच एक सफाईकर्मी महिला ने हिम्मत दिखाया और लालन-पालन करने के साथ उसे मातृत्व प्रेम देना शुरु किया। आज रोती बच्ची इस सफाईकर्मी के गोद में आकर शान्त हो जाती है अब इसने मासूम का नामकरण भी किया है, पिहू नाम से जानी जाती है यह मासूम।

अस्पताल प्रशासन के लिए इस बच्ची का पालन पोषण चिन्ता का कारण बन गया है। अब मासूम पूर्णरुप से स्वस्थ है अस्पताल ने बाल गृह को मासूम के स्वस्थ होने की सूचना दिया है ताकि कानूनी प्रक्रिया के साथ किसी मां की सूनी गोद भर सके और पिहू की किलकारी से उसका घर गूंजे। साथ हीं पिहू को ममता का आंचल मिल सके।