मंत्री राधा मोहन सिंह ने दीनदयाल के भव्य स्मारक का किया लोकार्पण

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मोतिहारी – पंडित दीनदयाल उपाध्याय बागवानी एवं वानिकी महाविद्यालय परिसर पिपरा कोठी में आज दीनदयाल के भव्य स्मारक का लोकार्पण केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने किया। इनका यह स्मारक सदियों तक हम सबों को प्रेरणा देता रहेगा। इस अवसर पर कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा कि विलक्षण बुद्धि, सरल व्यक्तित्व एवं नेतृत्व के अनगिनत गुणों के स्वामी भारतीय राजनीतिक क्षितिज के इस प्रकाशमान सूर्य ने भारतवर्ष में समतामूलक राजनीतिक विचारधारा का प्रचार एवं प्रोत्साहन करते हुए सिर्फ 52 साल की उम्र में अपने प्राण राष्ट्र को समर्पित कर दिए। आकषर्क व्यक्तित्व के स्वामी दीनदयाल उच्च-कोटि के दार्शनिक थे किसी प्रकार का भौतिक माया-मोह उन्हें छू तक नहीं सका।
                  

मंत्री राधा मोहन सिंह ने पिपरा कोठी कृषि विज्ञान केंद्र में स्थापित हाई टेक बम्बू नर्सरी का उद्घघाटन किया। 30 हजार से ज्यादा बांस की उत्तम क्वालिटी का पौधा तैयार हो चुका है। 15 रुपये प्रति दर पर आज से किसानों को उपलब्ध होगा। 12 किस्म के पौधे किसानों की आमदनी बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाएगा। घर, मचान, फर्नीचर, अगरबत्ती स्टिक, टोकरी आदि के अलग- अलग नए किस्म के पौधे किसानों को आमदनी बढ़ाने में मदद मिलेगी। इस नर्सरी की स्थापना 5 महीना पहले कृषि मंत्रालय भारत सरकार द्वारा की गई थी। इस स्थान पर शीघ्र ही बैम्बू फर्नीचर बनाने की फैक्ट्री स्थापित की जाएगी, जिसमें ट्रेनिंग भी दी जाएगी। इसके अलावे बैम्बू ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना की जाएगी।

                              
इस अवसर पर पर्यटन मंत्री प्रमोद कुमार, विधायक सचिन्द्र सिंह, श्यामबाबू यादव, विधान पार्षद बबलू गुप्ता, शासी निकाय ICAR के सदस्य अखिलेश कुमार सिंह, नाबार्ड किसान क्लब के अध्यक्ष राजेन्द्र प्रसाद गुप्ता, किसान नेता रामशरन यादव, राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति रमेश चन्द्र श्रीवास्तव एवं अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

            
पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जन्म जयंती के अवसर पर आयोजित किसान कल्याण सम्मेलन को संबोधित करते केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा कि प्रकृति से जितना लो, उससे अधिक लौटाओ ताकि आने आनी वाली पीढ़ियों को एक बेहतर दुनिया मिल सके। पंडित जी ने यह सब अब से पचास वर्ष से भी अधिक से पहले कहना शुरु किया। तब UNO हमारी हंसी उड़ाता था। हमें दकियानूसी बताता था। इस सदी की शुरुआत आते-आते उऩके बड़बोलेपन और उपभोगवाद के कारण दुनिया का जो हाल हुआ, और जिसका असर climate change में दिखने लगा, तब पश्चिम को थोड़ा एहसास हुआ। लेकिन दिखावे के लिए उसने आयोग बनाए कि क्या ऐसा सच है। आयोग ने भी कहा कि हां, यह सच है। फिर यूएन की विभिन्न एजंसियों ने भी इस भयावह तथ्य की पुष्टि की, तब यूएन चेता।