राजधानी पटना से सटे फतुहा प्रखंड के दौलतपुर गाँव में आज तक सड़क नहीं

224
0
SHARE

पटना – मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के शासनकाल में अधिकांश सुदूर देहाती क्षेत्रो के गाँवों में सड़क निर्माण कराया गया है। परंतु राजधानी पटना से सटे फतुहा प्रखंड के दौलतपुर गाँव में देश की आजादी के बाद आज तक सड़क नहीं बना है जबकि फतुहा विधायक डॉ० रामानंद यादव के गृह पंचायत मौजीपुर में स्थित है दौलतपुर गाँव। दौलतपुर गाँव के लोगों का कच्ची रास्ते से आना-जाना और बारिश के मौसम में रास्ते पर कई जगह गड्ढे में जमा पानी के रास्ते गुजरना यहाँ के लोगों की नियति बन गयी है।

सर पर खटिया और खटिया पर मरीज लाद कर पानी के रास्ते शहर जाने को मजबूर, ये है राजधानी पटना से सटे फतुहा प्रखंड मुख्यालय से पांच किलोमीटर दूर दौलत पुर गाँव के लोग। माथे पर बोझ लेकर जाना हो या किसी काम से शहर जाना हो तो यहाँ के लोगों का यह कच्ची सड़क और सड़क पर बने गड्ढे ही मुख्य रास्ता है। देश आजाद 15 अगस्त 1947 को हुयी थी पर यहाँ के लोगों को आज तक सड़क नहीं मिली। बारिश के मौसम में गांव में साइकिल भी जाने का रास्ता नहीं है, गाँव के लोग कच्चे रास्ते से किसी तरह बाइक और साइकिल से शहर से लौटते है परंतु गाँव के आधा किलोमीटर पहले ही गढ्ढे के पास बाइक और साइकिल का पार्किंग स्थल बना कर रख देते है, कई बार बाइक की चोरी भी हुयी है पर कोई दूसरा विकल्प भी इनके पास नहीं है। पहले गाँव के लोगों को फतुहा जाने के लिए पांच किलोमीटर जाना पड़ता था लेकिन पांच साल पहले पटना – बख्तिरपुर फोरलेन बना और गॉव के लोगो को थोड़ी राहत मिली और फोरलेन से गॉव की दुरी डेढ़ किलोमीटर हो गयी लोगों को डेढ़ किलो मीटर ही फजीहत झेलनी पड़ती है।

सबसे बड़ी बात है कि लगातार दूसरे टर्म तक रहे फतुहा के राजद विधायक डॉ० रामानंद यादव का घर मौजीपुर गॉव में है और दौलत पुर गॉव मौजीपुर पंचायत में दो किलोमीटर की दुरी पर अवस्थित है। विधायक चुनाव के समय सड़क बनाने का आश्वासन दे कर चले जाते हैं। गाँव के लोग बताते है कि कई बार विधायक से सड़क बनाने का गुहार लगाया पर कोई फायदा नहीं हुआ है।

गाँव के मुखिया ने बताया कि फोरलेन से गाँव जाने के के लिए प्रधान मंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत सड़क का निर्माण होना होना है जो मुखिया के फंड से बाहर का है। इसके लिए विधायक और सांसद दोनों से कागजी तौर पर आवेदन दिया गया है पर कोई जबाब नहीं मिला।

कुछ महीने पूर्व बिहार के विधायको में अपने फंड खर्च करने की बात सुर्खियों में आयी थी जिसमे सबसे कम विधायक फंड का उपयोग करने वाले बिधायक डॉक्टर रामानंद यादव का नाम था। अब सवाल है कि क्या फतुहा की जनता ने विधायक को वोट इसलिए दिया था कि उनकी समस्याएं धरी रहे और उनके पैसे लौट जाए?