सुषमा स्वराज की गीता के क्या यही हैं माँ-बाप ?

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पटना- पाकिस्तान से लौटी गीता दो साल से अपने परिजनों को तलाश रही है। गीता की कहानी किसी को पता भी नहीं चलती अगर रविवार को विदेश मंत्री सुषमा स्वराज मार्मिक अपील कर दो साल से इंदौर के एक एनजीओ में रह रही गीता के परिजनों को आवाज न देती कि वे गीता को अपना लें, बदले में गीता का सारा खर्च वे स्वयं उठाएंगी। इस अपील के बाद यूं तो कई परिवारों ने कहा है कि गीता उनकी बेटी है, बिहार के नालंदा के रहनेवाले एक दंपति ने भी दावा किया है कि पंजाब के करनाल में ट्रेन पर छूटी उनकी बच्ची ही गीता है।

भारत-पाकिस्तान के बीच दोस्ती की मिसाल बनी गीता, पिछले दो साल से अपने परिजनों से मिलने के लिए बेचैन है। सुषमा स्वराज के विशेष पहल के बाद देश लौटी गीता के परिवार वालों को खोजने में सरकार भी दो साल में असफल रही। कई लोग गीता को अपनी संतान होने का दावा कर चुके हैं लेकिन डीएनए की जांच में अब तक सारे दावेदार फेल हो चुके हैं।

गीता के माता-पिता होने का दावा कर रहे एक दंपत्ति सामने आए हैं। ये दंपत्ति मिशन ओपी से सटे नालंदा जिले के सारे थाना के अलीनगर निवासी रामस्वरूप चौधरी और चिंता देवी हैं। चिंता देवी ने बताया कि गीता उनकी खोई हुई बेटी पूजा है और जब उनकी बेटी को हमारी तस्वीर दिखाई जाएगी तो वह हमें पहचान लेगी। गीता की तस्वीर मोबाइल पर दिखाए जाने के बाद पड़ोसी श्याम देवी, मनोरम देवी, मोहन चौधरी इत्यादि ने भी गीता को पहचानने का दावा किया और कहा कि गीता अपने माता-पिता को तुरंत पहचान जाएगी।

चिंता देवी ने बताया कि बारह-चौदह साल पहले वे लोग हरियाणा के करनाल के ईंट-भठ्ठा पर मजदूरी करने गए थे, वहीं घर वापसी के क्रम में उनकी गूंगी बेटी स्टेशन पर ही छूट गयी और बहुत खोजने पर भी नहीं मिली। उन्होंने बताया कि पूजा के सर पर गोदना और कटे का निशान भी है। गीता के माता-पिता ने विदेश मंत्री से अपनी बेटी से उन्हें मिलाने की अपील की है।

दरअसल रविवार को विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने बिहार और झारखंड के मुख्यमंत्री से विशेष आग्रह कर गीता के परिजनों के तालाश करने का निवेदन किया था। विदेश मंत्री ने इन दोनों राज्यों से ही गीता के संबध होने का हवाला देते हुए समाचार माध्यमों पर खबर चलाये जाने की अपील की थी। परिजनों को खोजने वाले को एक लाख रूपये ईनाम की भी घोषणा विदेश मंत्री ने की है। सुषमा स्वराज के अपील पर मुहिम चलाया गया है जिसके बाद नालंदा के दंपत्ति ने यह दावा किया है।

वहीं यहाँ के ग्रामीण तथा पड़ोसियों ने बताया कि जैसा गीता बताया करती है गन्ने का खेत, तालाब, कुंआ वो सभी हमारे गाँव में है और वह 8 से 10 साल की उम्र में यहाँ गन्ने के खेतों में जाया करती थी। तालाब में उसके पिता मछली पकड़ा करते थे और वो मजार के पास बकरी चराती थी और भी ऎसी कई बाते हैं जिसको जानने और देखने के बाद गीता को सब कुछ याद आ जायेगा।

गीता का शक्ल अपने पिता और बड़ी बहन से मिलता है। उसके दो भाई और तीन बहने हैं। खो जाने के बाद उसके परिजन थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट भी देने गए थे परंतु थाने में गूंगा और बहरा होने की वजह से उनका कंप्लेन नहीं लिया गया था।

हालांकि वे नालंदा के जिलाधिकारी डॉ त्यागराजन से भी आज मिले जहां उन्होंने अपनी बड़ी बेटी और अपने सारे परिवार के तस्वीर जमा कर दिया है। अब उन्हें अपनी बेटी गीता से मिलने की चाहत है।