मक्के की फसल में दाना नहीं, किसान हुए बेहाल

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मुकेश कुमार सिंह

सहरसा – मक्का के नाम से विख्यात कोसी इलाका इन दिनों मक्के के दाने के लिए तरस उठा है. कोसी इलाके में इस बार मक्के की फसल में दाना ही नहीं है. किसान निराश और परेशान हैं . वानगी के तौर सिमरी बख्तियारपुर अनुमंडल के सिमरी पंचायत के किसानों का हाल बेहाल है जो मक्के की खराब फसल से न सिर्फ परेशान हैं बल्कि आत्महत्या करने पर उतारू हैं. वजह साफ है कि कर्ज लेकर सुनहरे सपनों की उम्मीदों के साथ खेती किया था पर मक्के के बीज ने दगा दे दिया. हालात ऐसा कि अब वह न घर का रहा और न ही घाट का. अब तो जीवन जीना एक समस्या बन गया है.

किसानों का मानें तो दुकान के द्वारा जो बीज उपलब्ध कराया गया वह सही नहीं था. जिस कारण सारी फसलें चौपट हो गई. आंखों में आंसू लिए रुंधे गले से पीड़ित किसान ने कहा कि फसल में दाना नहीं होने से सब कुछ बर्बाद हो गया. स्थिति बदतर है, दानाविहीन मक्के की फसल अब पशु चारा के अलावे कुछ नहीं. सरकार ने ध्यान नहीं दिया तो रेल पटरी पर कट कर या जहर खा कर मर जाऊंगा. कर्ज लेकर लगाया गया था फसल.

दरअसल सिमरी पंचायत के वार्ड संख्या चौदह के दर्जनों किसानों के सैकड़ो एकड़ में लगी मक्के की फसल दानाविहीन हो गई है. इस इलाके में अधिकतर लोगों का मुख्य पेशा खेती है परंतु मक्के की फसल में दाना नहीं आने से किसानों को कुछ भी समझ नहीं आ रहा है. किसान बताते हैं कि फसल तो देखने से पूरी तरह से स्वस्थ दिख रहे हैं और पांच से सात फीट के भी हो गए परंतु दाना न होने से किसान खून के आंसू रोने को मजबूर है.

किसानों के मुताबिक कर्ज लेकर फसल लगाई गई, दाना सरकार द्वारा तय दुकानों से लिया गया. समय-समय पर खाद्य व पानी देते रहे. लेकिन जब काटने की बारी आई तो फसल ने धोखा दे दिया. किसानों ने बताया कि मौसम की बेरुखी या बीज के सही नहीं होने का खामियाजा फसल उठा रहा है और जिस वजह से खेती पर आई लागत भी मिट्टी में मिल गई. पीड़ित किसानों ने कृषि विभाग से फसल बर्बादी की जांच कराने व क्षतिपूर्ति की मांग की है. वहीँ इस बाबत जब कृषि विभाग के अधिकारियों से इसका वजह जानने का प्रयास किया तो उन्होंने बताया कि मक्के में दाना नहीं आने का मुख्य वजह ठण्ड रहा जिसके कारण दाना नहीं आता है.

वहीँ दूसरी ओर मिट्टी में बोरन की कमी है जो बीज का पोषक तत्व का काम करती हैं. वह भी एक वजह हो सकता हैं। जहाँ तक मुआवजे की बात है तो वातावरण के दुष्प्रभाव के कारण यदि दाना बनने की क्रिया बाधित हुयी होगी तो उस स्थिति में मुआवजा दिया जा सकता है। वहीँ जिला कृषि पदाधिकारी ने इस बाबत बताया कि 8239 हेक्टेयर में मक्का की खेती किसानो द्वारा की गयी थी जिसमें से 400 हेक्टेयर के करीब खेतों में मक्का के बाली में दानविहीनहों की बातें सामने आयी हैं. जिसकी सघन जाँच हो रही है. इसके लिये टीम बना दी गयी है. रिपोर्ट आने के बाद सरकार को भेज दी जाएगी और वहां से जो निर्देश मिलेगा उसी के अनुरूप किसानों को मदद पहुंचायी जायेगी.