चम्पारण की बेटी फातिमा ने निबंध लेखन में बिहार का नाम किया रोशन

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पश्चिम चम्पारण: महात्मा गांधी की कर्मभूमि व वाल्मीकि की तपोभुमि के नाम से जाना जाने वाला बिहार के पश्चिम चम्पारण जिला एक बार फिर यह धरती लेखन व शब्दों की बाजीगरी के लिए राष्ट्रीय स्तर पर अपनी चमक बिखेर रही है। दसवीं कक्षा की छात्रा फरहत फातिमा ने राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान हासिल किया है। हाथ में सिल्ड व चेहरे पर मुस्कान लिए यह वह चेहरा है, जिसने अरसे बाद चम्पारण के नाम का परचम राष्ट्रीय स्तर पर फहराने का काम किया है।

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पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्रालय की ओर से 22 भाषाओं में पीसीआर प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था, जिसमें देश भर के प्रतिभागियों ने भाग लिया था। उर्दू भाषा में निबंध लेखन में फातिमा ने पूरे देश में प्रथम स्थान हासिल किया है।

फातिमा की इस उपलब्धी पर उसके साथ पढ़ने वाली छात्राएं व स्कूल प्रबंधन भी फुले नहीं समा रहा है। लिहाजा पुरस्कार लेकर घर लौटी फातिमा के घरवालों व स्कूल प्रबंधन ने शानदार स्वागत किया।

16 जनवरी को पेट्रोलियम राज्य मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान से पुरस्कार लेकर लौटी फातिमा ने इसका श्रेय अपने माता-पिता को देते हुए कहा कि अगर मेहनत व परिश्रम किया जाए तो कोई भी लक्ष्य दूर नहीं होता। इस दौरान स्कूल के शिक्षकों ने भी फातिमा की उपलब्धी पर गर्व करते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर हासिल की गयी यह उपलब्धी बेहतरीन है।

संत कोलम्बस स्कूल के शिक्षक कहते हैं कि प्रतिभा किसी परिचय का मोहताज नहीं। आज राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम पुरस्कार फातिमा को मिला है और वो देश का प्रतिनिधित्व करते हुए जापान दौरे पर जा रही है, यह बताने के लिए काफी है कि अब जिले का नाम ना सिर्फ देश में बल्कि विदेशों में भी रोशन होने जा रहा है।

शिक्षकों का कहना है कि फातिमा एक बार फिर से गोपाल सिंह नेपाली की तरह ही लेखन व कविता में जिले को एक नया आयाम देने की राह पर अग्रसर है।