इंडो-तिब्बत बार्डर पुलिस में बतौर कॉम्बैट ऑफिसर पहली भारतीय महिला अधिकारी बनी प्रकृति

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समस्तीपुर – ​कल तक महिलायें घर की चहारदीवारी के अंदर ही अपने अरमानों को दफ़न कर देती थी। लेकिन आज महिला किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से पीछे नहीं हैं। ऐसा ही कुछ अलग कर न केवल अपने और परिवार के सपनों को साकार किया बल्कि इंडो-तिब्बत बार्डर पुलिस में बतौर कॉम्बैट ऑफिसर पहली भारतीय महिला अधिकारी बनकर करोड़ो लड़कियों की प्रेरणा श्रोत बनकर उभरी है समस्तीपुर की प्रकृति। 

शिक्षिका माँ और एयर फ़ोर्स के अधिकारी के एक बेटे और एक बेटी में बड़ी लाडली प्रकृति बचपन से ही मेधावी और चंचल स्वाभाव की थी। स्कूली शिक्षा के बाद इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद प्रकृति ने सीएपीएफ की तैयारी शुरू की और पहले ही अटेम्प्ट में उसने यह उपलब्धि हासिल की। इंडो-तिब्बत बार्डर पुलिस में बतौर कॉम्बैट ऑफिसर पहली भारतीय महिला अधिकारी बनकर एक नया इतिहास कायम किया है। प्रकृति की माँ बताती हैं कि वह शुरू से ही बहुमुखी प्रतिभा की रही है।  स्कूल के हर एक्स्ट्रा कॅरिकुलम में शामिल होती थी। पहली बार जब प्रकृति स्कूल में स्काउट एन्ड गाइड में शामिल हुई तो उसके यूनिफॉर्म को पहनकर काफी खुश थी। अपनी लाडली बेटी के इस मुकाम पर पहुंचने पर उनके पिता कहते हैं कि प्रकृति शुरू से ही सेना के कार्यकलापों के बारे में जिज्ञासा रखती थी और अलग हटकर कुछ करने की तमन्ना रखती थी। 

जिले की लाडली के इस उपलब्धि पर उनके माता-पिता के साथ-साथ जिले के अधिकारी भी उनकी सराहना करते नहीं थक रहे। प्रकृति के जज्बे को लेकर समस्तीपुर के उप विकास उपायुक्त वरुण कुमार मिश्रा कहते हैं कि प्रकृति से प्रेरित होकर दूसरी बच्चियों में देश की सेवा करने की प्रेरणा जगेगी। प्रकृति ने न केवल जिले का बल्कि सूबे का नाम रौशन किया है।