बच्चों की तरह पाला, हर मौसम से बचाया,अब क्यों फेंकने को मजबूर हैं ये किसान?

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गया – सब्जियों के खरीददार नहीं मिलने से किसान सब्जियां फेंक रहे हैं। इन दिनों मंडियों में सब्जियों के ग्राहक तक नहीं मिल रहे हैं। मंडियों में सब्जियों की भरपूर पैदावार के बावजूद खरीददार नहीं मिलने के कारण किसानों को जैसे-तैसे दामों पर सब्जियाँ बेचनी पड़ रही है यहाँ तक की 1 रुपये किलो भी भिंडी लेने वाला तक कोई नहीं है। मजबूरन भिंडी के पौधे खराब न हो इसलिए भिंडी को तोड़ कर फेंकने को मजबूर है तो वहीं कुछ किसान अपने खेतों के भिंडी तोड़ कर खेतों में ही फेंक दे रहे हैं।

किसानों ने बताया कि भिंडी का बीज तक के पैसे अभी नहीं लौट पाया है पिछले कई दिनों से भिंडी को 1 से 2 रुपये किलो बेचनी पड़ रही है, अब तो उसके खरीददार भी नहीं हैं। जबकि खुदरा सब्जी दुकानदार 15 रुपये किलो बेच रहे हैं। खेतो में मेहनत किसान करता है फसल तैयार हो जाने के बाद जब सब्जी मंडियों तक इसे कुछ मुनाफा के सपने लिए आते हैं लेकिन किसानों के सपनो के दर सब्जी के थोक वयापारी तय करते है कि आज कौन सी सब्जी किस दर से लेनी है। बताया कि भिंडी तोड़ने के लिए प्रति घन्टा 30 रुपया के हिसाब से मजदूरों को देना पड़ता है जिसमें 1 मजदूर 1 घन्टा में 20 किलो तक भिंडी तोड़ पाता है। इस हिसाब से मजदूरी भी नहीं मिल पा रहा है तो लागत क्या और मुनाफा क्या है। स्थिति ऐसी हो गयी है कि थोक व्यपारियों के पास बेचने के लिए पैर पकड़ने पड़ रहे हैं।