बिहार सरकार की फसल क्षतिपूर्ति योजना से हो रही है किसानों की क्षति

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गया – बिहार सरकार की फसल क्षतिपूर्ति योजना से हो रही है किसानों की क्षति। एक लाभ के चक्कर में दूसरे फसल की हो रही है हानि, किसानों के लिए सरदर्द बना कृषि विभाग। फसल क्षतिपूर्ति योजनाओं का नहीं मिल रहा है लाभ, खेतों में सड़े फसलों को भी नहीं काट सकते हैं किसान। किसानों को किसान बने रहने के लिए करना होगा ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन। अब दिन भर खेती के बाद ऑनलाइन आवेदन के लिए कार्यालय का लगा रहे हैं चक्कर।

राज्य में गया जिला सुखाड़ घोषित होने के बाद किसानों को एक उम्मीद जगी कि अब सरकार द्वारा चलाई गई योजनाओं का लाभ मिलेगा। इसके लिए सरकार ने एक अलग पैमाना निकाला आखिर सरकार किसे किसान मानती है। कृषि विभाग के अनुसार जिन किसानों ने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन किया है सरकार की नजर में सिर्फ वही किसान है। गया जिले में 3 लाख 75 हजार किसान हैं जिसमें अभी तक 1 लाख 45 हजार किसान ही रजिस्ट्रेशन करा पाए है। सुखाड़ की स्थिति के बाद किसानों के खेतों में लगे धान की फसल तो है लेकिन उसमें दाने नही है।

किसानों ने फसल क्षतिपूर्ति योजना का लाभ लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन भी दिया है लेकिन जाँच नहीं हो पाई है। मजबूरन जो फसल सड़ गयी है उसे भी नहीं काट सकते है क्योंकि विभाग की टीम फसलों की जाँच करेंगे उसके बाद ही फसल क्षतिपूर्ति योजना का लाभ उन्हें दिया जाना है। फसल काटने में देर होने के कारण किसान दूसरे फसल नहीं लगा पा रहे हैं। सैकड़ो एकड़ धान के फसल बर्बाद हो गयी है। धान के पौधे में धान भी लगे लेकिन उसमें दाने नहीं है। किसानों ने बताया कि सरकार की उदासीनता के कारण दूसरा फसल नहीं लगा पा रहे हैं अगर इसे काट देते है बिना जाँच के तो लाभ नहीं मिलेगा मजबूरीवश सड़ी फसलों को खेतों में रखने को मजबूर है।

किसानों ने बताया कि खुद की खेती है कर्ज लेकर खेतो में बिचड़े लगाए थे, अब सरकार द्वारा लाभ भी नही दिया जा रहा है और न ही अगला फसल लगा सकते हैं। ऐसी स्थिति हो गयी है कि हमें बाहर जाना पड़ेगा अन्य शहरों में मजदूरी कर कर्ज तोड़ना पड़ेगा।

इस सम्बंध में गया जिला कृषि पदाधिकारी अशोक कुमार सिन्हा ने कहा कि जो किसान रेजिस्टर्ड होंगे वही सरकार के नजर में किसान है या किसान उसे मानेगी। जिसमें कई प्रकार के किसान हैं। फसल क्षतिपूर्ति योजना का लाभ देने में देरी हुई है लेकिन अगली फसल के लिए भी माना कि परेशानी हो रही है। जिले के 24 प्रखंडो के 332 पंचायतों में पंचायतवार जाँच टीम 30 दिनों में अपना रिपोर्ट देगी सड़ी फसलों की फोटोग्रफिक करा कर किसानों के खाते में उसका लाभ दिया जाएगा, जिसमे आपदा विभाग और क्षतिपूर्ति योजना का लाभ और बीमा योजना का लाभ कुल 3 लाभ मिलना है। इसके पहले डीजल अनुदान की राशि भी दी जानी है। इसकी समीक्षा की जा रही है। कुल मिलाकर कहे तो किसानों को 4 लाभ मिलना है लेकिन मिला कुछ भी नही है।