जॉर्ज साहब से क्या मिला नीतीश को ?

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पटना – रविंद्र भवन में आयोजित स्व0 जार्ज फर्नांडिस जी की श्रद्धांजलि सभा में शामिल हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जार्ज फर्नांडिस के साथ अपना निजी अनुभव को साझा किया. हालांकि इस मौके पर वे भावुक भी हुए. मुख्यमंत्री ने कहा कि जार्ज साहब को 88 साल की उम्र में मुक्ति मिली. उनकी मृत्यु से हम सब लोगों को काफी पीड़ा हुई. लगभग 10 वर्षों से वे अस्वस्थ चल रहे थे और वे सब भूल गए थे. मैं जब भी देखने गया तो उनकी स्थिति और ज्यादा ख़राब हो रही थी. सब कोई यह जानता है कि कोई व्यक्ति जन्म लेता है तो उसको जाना है, यह स्वाभाविक चीज़ है. लेकिन यह बात भी उतना ही सच है जब किसी के साथ रिश्ता होता है और आप उनके बारे में सब कुछ जानते हैं तो वो मन पर प्रभाव डालता है.

नीतीश ने कहा कि जननायक कर्पूरी ठाकुर से जार्ज साहब का संबंध था तो अक्सर वे बिहार आते-जाते थे. 1977 में जेपी ने मुजफ्फरपुर से जार्ज साहब को लडवाया जिसमें वे जीते 3 लाख से ज्यादा वोटों से. उनकी समाजवादी पार्टी के अंदर अहम भूमिका थी. भ्रष्टाचार के खिलाफ थे इसलिए बैचैन था उनका मन. मेरा 90 के बाद सरकार बनी तो जो स्थिति उत्पन्न होती चली गई धीरे-धीरे मेरा मन भी यहाँ की स्थिति देखकर विचलित होने लगा था. तब मै जार्ज साहब के पास ज्यादा जाता था और पूरी बात उनकी सुनता था. लगा जार्ज साहब अगर कुछ चाहेंगे, करेंगे तो हम उनके साथ हैं. जार्ज साहब तैयार थे बोले अब अलग पार्टी बनाएँगे.

एक बार उन्होंने नीतीश की परीक्षा ली. उसके बाद हाथ जोड़कर नीतीश ने जार्ज से कहा कि सर आपकी नेतृत्व में हमसब अलग हो या जरूरत हुआ तो निर्दलीय लड़ेंगे लेकिन इस्तीफ़ा दे देंगे. इस परीक्षा में नीतीश पास हुए. अगले दिन फीएट गाड़ी खुद चलाकार आये और सारे एमपी को इकठ्ठा किये. 14 लोग उसी दिन आलग होकर अलग पार्टी बनाए. फिर 1994 में समता पार्टी नामकरण हुआ. बहुत संघर्ष किया गया लेकिन जो कुछ भी हुआ जार्ज साहब के नेतृत्व में हुआ. पार्टी नहीं बनती तो अलग से पहचान नहीं मिलता हमलोग को.

नीतीश और जार्ज साहब की राजनैतिक संबंध के अलावा भी काफी घनिष्ठा थी. वे दोनों साथ घूमते थे. समता पार्टी बनाया. मीटिंग 11 बजे से शुरू होता था जिसमें शाम में 7 बजे जार्ज को मौका मिलता था बोलने का. रात-रात तक बात करते थे लोगों से वो. नीतीश ने अनुभव साझा करते हुए कहा कि ट्रेन में ऊपर वाले सीट पर बैठते थे जार्ज साहब. एक रात देखे कि कुछ बोल रहे थे वो. एक रिपोर्ट था उनके पास, जो चिट्ठी भेजता था उसका जवाब देते थे रिकॉर्ड करके रात में एक बजे.

नीतीश ने कहा कि स्वास्थ्य ठीक रखने के लिए अपना मूत्र का पानी पीने बोलते थे. उनको स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या थी, लूज मोशन होता था लगातार उनको, जैसे महिलाएं सैनिटरी पैड रखती वैसे वो इंतजाम कर के चलते थे. उन्होंने खुद बताया कि वह अपना मूत्र पीते जिससे उनकी यह बीमारी ठीक हुई. हम बहुत प्रभावित हुए हमभी 3-4 साल पीये. उनकी इस बात का वकालत भी करते थे.

आगे नीतीश कुमार ने कहा कि कौन जानता है उनकी खासियत क्या है? सबको समझाते थे राजनीति के अलावा. हमको कई बार कम उम्र में चेहरे पर दाग होने लगा था, हम जब स्वमूत्र पीने लगे तो गायब हो गया सब दाना. एक से एक चीज़ हैं उनके बारे में. सब जीव-जन्तु से स्नेह था उनको. देशी कुत्ता पलते थे वो, पार्लियामेंट तक वो जाता था कुत्ता. मीटिंग में एक कुर्सी पर वो बैठता था. किसी का हिम्मत नहीं उसको हटाये, आराम से बैठता था. हो सकता वो भी पहले राजनीति में रहा होगा.