गया से खजाना हटा

447
0
SHARE

1857 की क्रान्ति की लहर से गया भी अछूता नहीं रह सका. ग्रांड ट्रंक रोड के किनारे बसे होने के कारण इसका बड़ा महत्व था. गया के मजिस्ट्रेट अलोर्जो मोनी को अपने 45 अंग्रेज और 100 हिन्दुस्तानी सिपाहियों पर भरोसा था. शहर के लोगों से उसे भय नहीं था. लेकिन उसे सूचना मिली थी कि देहाती इलाकों से 300-400 लोगों का एक जत्था शहर पर आक्रमण करने की तैयारी कर रहा है.

31 जुलाई को पटना से भी खबर मिली कि ” जगदीशपुर के जमींदार बाबू कुंवरसिंह ने डनवर को मार भगाया है.” पटना के कमिश्नर ने इसलिए अपने संदेश में कहा कि “अब उनके लिए अंग्रेजी राज को बचाने के लिए केंद्र में एकत्र हो जाना जरुरी है. इसलिए अलोर्जो मोनी को गया से खजाना लेकर पटना पहुंचने का हुक्म मिला. आस-पास जो भी अंग्रेज ठहरे हुए थे, उन्हें भी बुलावा भेजा गया. शाम को छ: बजे अलोर्जो मोनी गया से खजाने के साथ पटना के लिए रवाना हो गया.

सात लाख रूपये लेकर अलोर्जो किसी प्रकार गया से रवाना हुआ. उसके पास कोई गाड़ी नहीं थी. वह तीन मील ही आगे बढ़ा था कि उसे खतरा महसूस हुआ. उसने और अफीम महकमे के हाकिम हॉलिंग्स ने तय किया कि गया वापस लौट जाना ही ठीक होगा. अंत में तय हुआ कि अलोर्जो मोनी खजाना लेकर वापस गया चला जाए और पूरी पार्टी पटना चली जाए. अत: अलोर्जो मोनी खजाने के साथ गया लौट आया.

उन दिनों शेर घाटी में फ़ौज की टुकड़ी रहती थी. अलोर्जो ने सोचा कि इसी फौज की टुकड़ी के संरक्षण में खजाना लेकर वह पटना चला जाए. लेकिन तभी खबर मिली कि दानापुर के सिपाहियों ने विद्रोह कर दिया है और उन्होंने आरा पर चढ़ाई कर उसे लूट लिया है. गया वालों से कोई मदद नहीं मिली. जमींदार अनमने भाव से तटस्थ थे. इसी बीच खबर आई कि “8-वीं पैदल सेना गया के लिए चल पड़ी है और उसके साथ एक तोप भी है.” तब लाचार होकर मोनी बैलगाड़ियों पर खजाना लादकर ग्रांड ट्रंक रोड पर चल पड़ा. वह कुछ ही दूर गया था कि उसे याद आया कि बंगले पर कुछ आवश्यक वस्तु छूट गई है.

वह भागा-भागा वापस बंगले पर आया, तो उसने देखा कि जेल टूट चुकी है और कैदी शहर में स्वतंत्र घूम रहे हैं. वह तुरंत घोड़े पर सवार हो अपने कारवाँ की तरफ भागा. लेकिन डोमी जाने वाली सड़क पर पहाडपुर के पास, मौजूदा जेल के पास, कैदियों और विद्रोहियों ने आगे बढ़कर मोनी और उसके सिपाहियों का रास्ता रोक लिया. एक हल्की झड़प हुई, लेकिन मोनी भागने में सफल हो गया. खजाना किसी प्रकार रानीगंज स्टेशन पहुंचाया गया और वहां से कोलकाता भेज दिया गया.