क्या आप जानते हैं, अंग्रेजों ने दिया था दरभंगा हाउस नाम !

2004
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पटना – गेरुए रंग से रंगी व खूबसूरत कलाकृतियाँ दरभंगा हाउस की सुंदरता में चार चाँद लगाने के साथ लोगों को अपनी ओरआकर्षित करती है. गंगा किनारे बना दरभंगा हाउस दरभंगा महाराजाओं का ठिकाना होने के साथ-साथ राज्य की प्रमुख बैठकों का केंद्र रहा. शोधकर्ता की मानें तो 1820 के आसपास महाराजा का आना-जाना पटना शहर में हुआ करता था. उस वक़्त पटना सिटी शहर का सबसे बड़ा केंद्र हुआ करता था. पटना सिटी में शहर के बड़े लोगों का ठिकाना था. जिस कारण दरभंगा महाराज ने पटना सिटी में दरभंगा हाउस के नाम से मकान बनवाया था.

वास्तुकला काल की बेहतरीन नुमाइश

अंग्रेज भी शहर के मुख्य केंद्र गांधी मैदान, अशोक राज पथ की ओर आते थे. इसी दौरान महाराजा लक्ष्मेश्वर सिंह ने गंगा किनारे खाली जमीन पर दरभंगा हाउस की नींव रखी. जानकारों की मानें तो 1898 के आसपास दरभंगा हाउस का निर्माण हुआ. महल को भव्य बनाने एवं वास्तुकला की बेहतर नुमाइश के लिए अंग्रेजों के शासनकाल के दौरान वास्तुकला मर्मज्ञ डॉ. एमए कोरनी को इसका दायित्व सौंपा गया. मैदान पर भव्य महल बनने के बाद महल से सटे एक बगीचे का भी निर्माण हुआ.

मेडिकल कॉलेज बनाने को दी जमीन

समाज में राजा-महाराजाओं के प्रति जो गलत धारणा थी उसे दरभंगा महाराज ने बदला. उन्होंने गरीबों को बेहतर चिकित्सा सुविधा देने के लिए 1925 में पांच लाख रूपये और बीस बीघा जमीन दान स्वरुप पटना मेडिकल कॉलेज बनाने के लिए दी. बाद में जिस जमीन पर महाराज का बगीचा था उस जगह पर अस्पताल का निर्माण हुआ. समाज में शिक्षा का व्यापक प्रचार-प्रसार हो और विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा मिले जिसके लिए दरभंगा महाराज लक्ष्मेश्वर सिंह ने पटना कॉलेज के निर्माण में अपनी अहम भूमिका निभाई.

उन्होंने कॉलेज के निर्माण में 65 हजार रूपये की सहयोग राशि दी. जिससे कॉलेज का निर्माण हो सके और शहर में शैक्षणिक गतिविधियाँ सुचारू रूप से चल सकें. यही नहीं महाराज ने अपनी पूरी जमीन व महल वर्ष 1958 में पटना विवि को शिक्षा के लिए दान स्वरुप दे दिया. दरभंगा महाराज लक्ष्मेश्वर सिंह के छोटे भाई महाराज रामेश्वर सिंह काली मां के परम भक्त थे. जिस कारण महाराज देश के प्रमुख हिस्सों में मां काली की प्रतिमा स्थापित की साथ ही एक मूर्ति दरभंगा हाउस में भी बैठाई. जो बाद में दरभंगा हाउस काली मंदिर के नाम से विख्यात हुआ.

अंग्रेजों ने दिया था दरभंगा हाउस नाम

दरभंगा हाउस पारंपरिक तौर-तरीकों को देखते हुए इसे दो भागों में बांटा गया था. एक भाग महाराज ब्लॉक तो दूसरा भाग महारानी ब्लॉक. दोनों ब्लॉक के बीच महाराजा परिवार की कुल देवी काली का एक भव्य मंदिर का निर्माण किया गया था. महाराजा ब्लॉक में महिलाओं का प्रवेश करना मना था जबकि महारानी ब्लॉक में बाहरी पुरुषों का प्रवेश मना था. तिरहुत सरकार में लक्ष्मेश्वर सिंह की मृत्यु के बाद राजा रामेश्वर सिंह उस महल में रहने लगे. बाद में अंग्रेजी हुकूमत ने अपनी नीति में परिवर्तन कर उस महल का नाम दरभंगा हाउस कर दिया.

जमींदारी के खिलाफ यहीं से शुरू हुई लड़ाई, गाँधी ने की पब्लिक मीटिंग

दरभंगा महाराज कामेश्वर सिंह जमींदारी के खिलाफ लड़ाई को लेकर बैठक इसी भवन में करते रहे. गुप्त बैठकों की मेजबानी के लिए मशहूर दरभंगा हाउस चंपारण आन्दोलन का मुख्य केंद्र रहा. भैरव लाल दस की मानें तो जब महात्मा गाँधी वर्ष 1917 में पटना आये थे तो दरभंगा हाउस में रूककर पब्लिक मीटिंग की. अंग्रेज शासकों ने गांधी के चंपारण आने के बारे में महाराज से पूछा था तब महाराज ने कहा था, गांधी किसी को परेशान करने नहीं आ रहे हैं. गाँधी के साथ हाउस में डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, अनुग्रह बाबू सहित शहर के कई नेताओं की गुप्त बैठक हाउस में होती रही.