एक रूपये किराया से चलता था पटना कला शिल्प महाविद्यालय

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पटना – सूबे का एक मात्र कला एवं शिल्प महाविद्यालय का गौरव प्राप्त करने वाला पटना कला शिल्प महाविद्यालय का स्वर्णिम इतिहास रहा है. कला प्रशिक्षण के सबसे बड़े केंद्र के रूप में विद्यापति मार्ग पर स्थित कॉलेज ने देश में विख्यात होने वाले कई नामचीन कलाकारों को देकर बिहार का मान बढ़ाया. कला और शिल्प कॉलेज को प्रदेश में स्थापित करने का श्रेय राधामोहन को जाता है. उन्होंने ही पहले 25 जनवरी 1939 को वसंत पंचमी के दिन गोविंद मित्रा रोड में शिल्प कला कॉलेज की नींव रखी थी.

पटना नगर निगम में एक रूपये किराया से चलता था विद्यालय

विद्यालय खोलने के बाद मोहन ने अपने भांजे एवं दो चार लड़कों के साथ इसकी शुरुआत की. धीरे-धीरे बच्चों की संख्या बढ़ने लगी तो राधामोहन ने अशोक राजपथ स्थित खुदा बख्श लाइब्रेरी के पास पटना नगर निगम के भवन में एक रूपये महीने किराया देकर कुछ समय तक विद्यालय चलाया. बच्चों की संख्या बढ़ने लगी तो शहर के जाने-माने वकील नागेश्वर प्रसाद ने कॉलेज खोलने के लिए राधामोहन को 500 रूपये की राशि दी. आर्थिक सहयोग एवं ट्रस्ट के माध्यम से कुछ समय तक विद्यालय चलता रहा. फिर सरकार के शिक्षा विभाग से स्वीकृती मिलने के बाद बंदरबगीचा के एक किराए के मकान में विद्यालय चलने लगा.

कुछ समय बाद पटना आइसीएस जीएस माथुर की प्रेरणा से विद्यापति मार्ग पर जमीन मिली. बिहार सरकार ने वर्ष 1949 में अपने नियंत्रण में लिया और स्कूल ऑफ आर्ट्स एंड क्राफ्ट के नाम पर डिप्लोमा कोर्स आरंभ कर दिया. वहीं वर्ष 1957 के दौरान महाविद्यालय को विद्यापति मार्ग में स्थानांतरित कर दिया गया.

बिहार कला दीर्घा की स्थापना के लिए पटना जीपीओ के पीछे मिली जमीन

12 अप्रैल 1977 को सरकारी कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड क्राफ्ट में बदलने के साथ पटना विवि के अधीन हो गया. आइसीएस जीएस माथुर ने कॉलेज के लिए नये भवन और छात्रों के रहने के लिए हॉस्टल का निर्माण कराया. देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद प्रबंधन समिति के पहले सदस्य के रूप में अपनी भूमिका निभाई. कला दीर्घा की हुई थी स्थापना शहर में कला का व्यापक प्रचार-प्रसार हो जिसके लिए कॉलेज संस्थापक राधामोहन के कार्यकाल में शिल्पी कला संघ, शिल्प कला परिषद् एवं कला दीर्घा की नींव पड़ी थी. प्रोफेसर व कलाविद श्याम शर्मा की मानें तो बिहार कला दीर्घा की स्थापना के लिए पटना जीपीओ के पीछे जमीन मिली थी. जहाँ पर राजेन्द्र प्रसाद की प्रतिमा भी लगाई गयी थी, लेकिन कुछ समय बाद वहां से कॉलेज परिसर में स्थापित किया गया.

कॉलेज के पहले प्राचार्य बने राधा मोहन

शिल्प महाविद्यालय में प्राचार्य के पद पर विभिन्न लोगों ने अपनी सेवा देकर कला शिल्प महाविद्यालय की गरीमा को बरक़रार रखा. इस दौरान कई ऐतिहासिक कार्य परिसर में किये गये. जिसमें राधा मोहन, अनीता दास, पीएसएन सिन्हा, एसएम राज, वारिश हादी, श्याम शर्मा, फूलारा सिन्हा, अनुनन्या चौबे, सादरे आलम, डीएन शर्मा, डॉ. इए अरशद, डॉ. कृतेश्वर प्रसाद, अरुण कुमार, शंकर दत्त, अतुल आदित्य पांडेय आदि ने अपनी भूमिका अदा की.

पटना कलम की दुर्लभ पेंटिंग का संग्रह

जानकारों की मानें तो कुछ समय तक कला दीर्घा में 500 से अधिक ऊपर चित्र, पेंटिंग, मूर्ति जिसमें बंगाल, पटना कलम चित्र शैली आदि की दुर्लभ कलकृतियों की प्रदर्शनी काफी समय तक लगी रही. जिसे बाद में बंद कर दिया गया. कई दुर्लभ कलाकृतियों में पिकासो से लेकर दुनिया के कई श्रेष्ठ और नामचीन कलाकारों के वर्क थे. जिसमें कुछ कलाकृति आज गैलरी में हैं. परिसर में कई दुर्लभ पेंटिंग कॉलेज परिसर के प्राचार्य कार्यालय में देश की आजादी के पहले कई कलाकारों द्वारा बनाई गयी पेंटिंग की अद्भुत कलाकृति मौजूद है. जिसमें जर्मन पेंटर लैंग हैमर की पेंटिंग आज भी मौजूद है.

परिसर में देखे मुंबई का धोबी घाट

बंगाल के नामी कलाकार अतुल बोस जिनकी छवि एक आदिवासी व्यक्ति के रूप में है वह परिसर में सुरक्षित है. ब्रिटिश कमिश्नर विलियम टेलर की दुर्लभ पेंटिंग कॉलेज में मौजूद है. इसके आलावा आर्ट कॉलेज के संस्थापक राधामोहन प्रसाद की दुर्लभ पेंटिंग के साथ आजादी के पहले बने मुंबई के धोबी-घाट को पेंटिंग को भी परिसर में उकेरा गया है.