बटेश्वर मंदिर में भादो पूर्णिमा पर लगता है मेला

2383
0
SHARE

भागलपुर – कहलगांव में बटेश्वर मेला की धूम रहती है. यहाँ भादो पूर्णिमा पर मेला का आयोजन होता है. प्रसिद्ध व प्राचीन शैव स्थल बटेश्वर स्थान में उत्तरवाहिनी गंगा में स्नान करने तथा बाबा बटेश्वर नाथ महादेव का जलाभिषेक करने अप्रत्याशित भीड़ उमड़ पड़ती है. बिहार के हर कोने से लोग यहाँ आते हैं. इस दौरान बटेश्वर में बड़ा मेला लगा रहा जहाँ सैंकड़ों दुकानें लगती है. दुकानों से लोग खरीदारी करते हैं. प्रसाद के साथ खिलौने और खाने-पीने तक के सुविधाएं यहाँ उपलब्ध हैं.

मेले के दौरान 55 हजार से अधिक श्रधालुओं गंगा स्नान करते हैं. इसके बाद बाबा बटेश्वर नाथ महादेव का जलाभिषेक करते हैं. मेला समिति मेले को लेकर काफी तैयारी करती है. इस अवसर पर बिहार और झारखंड के सीमावर्ती क्षेत्रों से सैंकड़ों की संख्या में आदवासियों के हुजूम भी आते हैं और वो सभी पारंपरिक तरीके से गंगा पूजन और बटेश्वर महादेव की पूजा अर्चना करते हैं. उसके बाद यह सभी लोग अपने तंबुओं में आदिवासियों द्वारा सामूहिक होकर पारंपरिक तरीके से पूजा करते हैं. इस दौरान विशेष तौर पर लोटा पूजा और मन्नत मनौतियों की पूजा होती है. मेला में आदिवासी गीत और पारंपरिक नृत्य विशेष आकर्षण का केंद्र रहता है.

वहीं तांत्रिकों तथा भगतों ने भी श्मशान घाट किनारे तंत्र साधना करते हैं. बटेश्वर के निकट बांस के घने जंगलों में स्थित बासुरी देवी मन्दिर में भी भक्त जाते हैं. इसके साथ भगतों का साधना भी होता है. वहीं कहलगांव में भी उत्तरवाहिनी गंगा स्नान करनेवालों का ताँता लगा रहता है. यहाँ महोत्सव के दौरान ड्रोन से बटेश्वर मन्दिर पर पुष्प वर्षा किया जाता है. यह आकर्षण का केंद्र होता है. लोग फूलों की बारिश के समय तालियों की गडगडाहट और हर-हर महादेव, बोल बम और जय बटेश के नारे लगाते हैं. इससे सम्पूर्ण बटेश्वर गुंजायमान हो उठता है.

कहलगांव के प्रसिद्ध बटेश्वर स्थान में श्रावणी मेला भी लगता है. यहाँ सावन और भादो दोनों माह मेले जैसा ही माहौल रहता है. पूरे मंदिर परिसर की सजावट भी लोगों को काफी आकर्षित करती है. इस दौरान चौबीसों घंटे पूजा का आयोजन होता रहता है. प्रत्येक सोमवार को रुद्राभिषेक एवं गंगा महाआरती भी होती है. श्रद्धालुओं के लिए शुद्ध जल, शरबत एवं चॉकलेट की व्यवस्था की जाती है. यहाँ अधिकांश पूर्णिमा के दिन मेला लगता है. आस पास के लोग यहाँ पहुंचकर पूजा करते हैं.