मंदिरों में शुमार बूढ़ानाथ में हुई शादी का रिश्ता रहता है अटूट

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भागलपुर – बूढ़ानाथ सिल्क सिटी भागलपुर का एक प्रमुख धार्मिक स्थल है. यहाँ भगवान शिव का अत्यंत प्राचीन मंदिर है. मंदिर का तीन सौ वर्ष पुराना गौरवशाली इतिहास है. त्रेता युग की कथा से इस मंदिर की स्थापना का इतिहास मिलता है. कहा जाता है कि बक्सर से ताड़का सुर का वध करने के बाद वशिष्ठ मुनि अपने शिष्य राम और लक्ष्मण के साथ भागलपुर आये थे और उसी समय यहाँ उन्होंने बूढ़ानाथ मंदिर की स्थापना कर शिवलिंग की पूजा-अर्चना की थी.

शिव पुराण के द्वादश अध्याय में भी इसका वर्णन है. इसी मंदिर के नाम से ही मोहल्ले का नाम भी बूढ़ानाथ रखा गया. इस मंदिर के प्रति पुरातन काल से लोगों की आस्था बनी हुई है. पर्यटन के हिसाब से यह काफी उपयुक्त है. जनश्रुति है कि भगवान् राम के गुरु वशिष्ठ मुनि ने यहाँ शिवलिंग स्थापित किया. यहाँ शिव के दरबार को फौजदारी दरबार कहा जाता है. पूर्व में गंगा मंदिर का चरण चूमती थी. लेकिन अब गंगा काफी दूर चली गई है. बूढ़ानाथ बाबा के नाम पर एक मोहल्ला बसा हुआ है. मंदिर के उत्तर गंगा बहती है. यहाँ अंग्रेजों के समय का भवन है. हालांकि निर्माण के कारण मंदिर का स्वरुप बदलता रहा है. भागलपुर के इस मंदिर में महाशिवरात्रि के साथ-साथ सावन मास में काफी भीड़ रहती है. मेला सा माहौल हमेशा यहाँ रहता है.

यहाँ हुई शादी का रिश्ता अटूट रहता है

इस मंदिर में शादियाँ भी होती हैं. यहाँ मात्र डेढ़ हजार में शादी संपन्न हो जाती है. वो भी सरकारी प्रूफ के साथ. यहाँ शादी करने में मात्र 1501 रूपये का रसीद कटाना होता है. मंदिर में यहाँ शादियों को लेकर काफी भीड़ रहती है. हर साल हजार से अधिक जोड़ों की शादियाँ होती है. मंदिर परिसर में कई शादियाँ पूरे प्रबंधन के साथ होती हैं. शादी वाले परिवार यहीं लड़के और लड़की को भी देखते हैं और रिश्ते पक्के भी किये जाते हैं. इससे मंदिर की आय भी होती है.

सूबे के प्रसिद्ध मंदिरों में शुमार बूढ़ानाथ में शादी करने के लिए लड़की और लड़के को आधार कार्ड भी देना होता है. कम-से-कम लड़की की उम्र 18 और लड़के का उम्र 21 वर्ष जरुरी है. यहाँ हुई शादी का रिश्ता अटूट रहता है. मंदिर के व्यवस्था में पहले से काफी बदलाव होने के कारण लोग नेपाल, बिहार, झारखण्ड, उत्तरप्रदेश सहित अन्य जगहों से भी यहाँ शादी करने आते हैं. यहाँ कमरा, बिजली, जेनरेटर, सफाई, पानी आदि की समुचित व्यवस्था अन्य मंदिरों की तुलना में काफी बेहतर है.

महाशिवरात्रि पर काफी भीड़ रहती है मंदिर में

यहाँ का इतिहास काफी पौराणिक है. यह मंदिर आस्था का केंद्र भी है. शहर में अवस्थित बूढ़ानाथ मंदिर धार्मिक धरोहर के रूप में समृद्ध व विश्व विख्यात है. इस मंदिर में अन्य दिनों में भी पूजा-अर्चना के लिए श्रधालुओं की भीड़ उमड़ती है. वहीं महाशिवरात्रि और सावन के मौके पर पर पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं का इस मंदिर में लंबा तांता लगता है. यहाँ महाशिवरात्रि के मौके पर शोभायात्रा निकाली जाती है, जो शहर के विभिन्न मार्गों से गुजरता है. शाम होते ही यहाँ भजन-कीर्तन भी शुरू हो जाती है. रात को भव्य श्रृंगार पूजा का आयोजन होता है. शिवरात्रि को पांच-छह क्विंटल से अधिक दूध शिवलिंग पर चढ़ता है. रंग-बिरंगी रौशनी से मंदिर को सजाया जाता है.