सच्चे मन से मांगी गयी मुराद पूरी होती है कुंडलपुर में

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नालंदा – नालंदा से लगभग चार किलोमीटर की दूरी पर कुंडलपुर गाँव अवस्थित है. ऐसी मान्यता है कि जैनों के 24वें तीर्थकर भगवान महावीर का जन्म यहीं हुआ था. जैन आचार्या ज्ञान मति माता भगवान महावीर की जन्म स्थली कुंडग्राम को कुंडलपुर से संबध करती है. इसलिए हाल ही में उनके द्वारा यहाँ भव्य जैन मंदिर का निर्माण किया गया है. यही वजह है कि यह स्थान जैनियों के लिए प्रमुख आस्था का केंद्र है. तीर्थराज सम्मभेद शिविर जी की यात्रा करने वाले धर्मावलम्बी भगवान महावीर की जन्म भूमि कुंडलपुर के दर्शन करने अवश्य जाते हैं.

यहाँ एक प्राचीन शिखरवंद मंदिर है जिसमें भगवान महावीर की श्वेत वर्ण की साढ़े चार फीट अवगाहना की भव्य पदमासन प्रतिमा विराजमान है. इसी जिनालय की पवित्र भूमि पर गणधर गौतम नामी का जन्म हुआ था. मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गयी मुराद यहाँ पूरी होती है. कुंडलपुर का प्राचीन नाम गुरूवार ग्राम था. प्रथम चौमासे के समय भगवान महावीर ने इस गाँव की परिक्रमा की थी. परिक्रमा के समय अनेक कुंड पाए गए. इसलिए इस गाँव का नाम कुंडलपुर पड़ा. वर्ष 2002 में गमिनी प्रमुख आर्थिका ज्ञानमती माता जी का यहाँ पर्दापण हुआ और जिनालय क्षेत्र से लगभग 100 फीट आगे एक बड़ी जमीन खरीद कर भगवान आदिनाथ, भगवान महावीर, नवग्रह देवता मंदिर तथा तीन चौबीसी मंदिर का निर्माण हुआ, जिससे क्षेत्र की भव्यता और सुन्दरता कई गुणा बढ़ गयी. उसी स्थान पर लाल पत्थर का बहुत ही विशाल और सात मंजिला नंद्दावती महल का भी निर्माण किया.

विशेष रूप से भगवान महावीर के जन्म महल की प्रतिकृति के रूप में सर्वाधिक प्रसिद्धि को प्राप्त लाल पाषाण महल आने वाले समस्त पर्यटकों और भक्तों को अत्यंत आकर्षित करता है. इस तीर्थ को बिहार सरकार ने भी बिहार के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल किया है. श्रद्धालुओं और पर्यटकों का आकर्षण का एक प्रमुख स्थल नयावर्त महल जैन मंदिर है. द्वंदों द्वारा सजाये गए जिस सात मंजिले नेद्दावर्त महल में भगवान महावीर का जन्म हुआ था, उस नंद्दावर्त महल का निर्माण किया गया. सात मंजिल के स्वरुप को दरसाने वाले इस महल में भगवान महावीर का पालना और उनके जीवन सम्बंधित प्राचीन कलाकृतियों का दिग्दर्शन कराया गया है.

यह स्थान प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय से मात्र तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. भगवान महावीर की अवगाहना प्रमाण ख्द्गासन प्रतिमा विराजमान है. नये मंदिर में मूलनायक भगवान ऋषभदेव स्वामी की सवा 11 फीट की प्रतिमा स्थापित है. प्रतिमा में ऋषभदेव के माथे पर इनकी माता मरूदेवी विराजमान हैं. यहाँ आनेवाले तीर्थयात्री मूलनायक भगवान ऋषभदेव की प्रतिमा की भव्यता और दिव्यता का दर्शन कर धन्य हो जाते हैं.