नमक सत्याग्रह आन्दोलन में चौगाई लोगों की क्या थी भूमिका

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“हर गलियों हर कूचे में लग गई आग आजादी की।
चलो हिन्दवों स्वागत करने देवी खड़ी आजादी की।।”

12 मार्च, 1930 को महात्मा गांधी साबरमती आश्रम से ऐतिहासिक दण्डी मार्च पर कूच किये। गांधी के दण्डी मार्च के दौरान 18 मार्च, 1930 को डुमराँव में एक विशाल जनसभा हुई, जिसमें अन्य गाँवों के अतिरिक्त चौगाई (उज्जैनियां राजपूत प्रधान ग्राम, बक्सर) के केशरी प्रसाद सिंह, चंद्रशेखर प्रसाद सिंह, सीताराम सिंह, हरिहर प्रसाद सिंह, नथुन हलवाई, देवी लाल प्रसाद, शिव कुमार प्रसाद आदि ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। बक्सर जिला में नमक सत्याग्रह का श्रीगणेश सर्वप्रथम राष्ट्रवादी उज्जैनियों के गढ़ चौगाई गाँव में हुआ। कहा जाता है कि मास्टर जयप्रकाश लाल के नेतृत्व में सुमेश्वर सिंह, लक्ष्मीकांत तिवारी, अखौरी रामनरेश सिन्हा, मदन मारवाड़ी, रामचंद्र पटेरा इत्यादि बक्सर से नमक सत्याग्रह के निमित्त चौगाई गाँव के लिए प्रस्थान किये।

चौगाई के चंद्रशेखर सिंह, सीताराम सिंह, गिरीजा सिंह, एवं हरीफा सिंह द्वारा अप्रैल, 1930 के मध्य में सरदार हरिहर प्रसाद सिंह के नेतृत्व में चौगाई में नमक क़ानून को तोड़ने की शुरुआत हुई। गली और नोनी लगी मकानों की मिट्टी को इकट्ठा किया और उसे उबाला गया। फिर किरासन तेल के टीन में छाना गया। नमक सत्याग्रह में बाबू केशरी सिंह के बगीचे में कैंप चलता था और बाबू चंद्रशेखर सिंह की बाग़ में नमक तैयार किया जाता था। इस अवसर पर सरदार हरिहर सिंह ने एक स्वनिर्मित राष्ट्रीय गान गाया था।

“हर गलियों हर कूचे में लग गई आग आजादी की।
चलो हिन्दवों स्वागत करने देवी खड़ी आजादी की।।”

इस प्रकार बक्सर ही नहीं, सम्पूर्ण शाहाबाद में नमक सत्याग्रह का प्रधान केंद्र चौगाई गाँव ही था और चौगाई के बाबुओं की नमक आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका थी। बक्सर शहर में भी नमक सत्याग्रह के दौरान चौगाई के बाबू चंद्रशेखर सिंह के भव्य भवन में ही पहला कैंप चला था। तत्पश्चात उनके घर से चरित्रबन में नमक सत्याग्रह का कैंप चलाया गया था।

जब 16 अप्रैल, 1930 को पटना में अंग्रेज सैनिकों ने नमक सत्याग्रहियों पर कहर ढाया, तो उसका समाचार 17 अप्रैल, को चौगाई के राष्ट्रवादियों ने सुना और सरदार हरिहर सिंह के नेतृत्व में 18 अप्रैल, 1930 को पटना लॉन के लिए कूच किया। पटना गांधी मैदान में शनिवार 19 अप्रैल, 1930 को 5-5 शाहाबादी सत्याग्रहियों का जत्था चला। सरदार साहब ने इस अवसर पर भी निज निर्मित देशभक्ति का गाना गाया था, जिसका शीर्षक था-

“घोड़वा के टॉप बीच मरे के पड़ी”

एम.एम.पी. के असिस्टेंट कमान्डेंट, जी चर्चर और ए.एस.पी., बाल्कर के नेतृत्व में बलुची सैनिकों द्वारा घूसा मारने, बूट से मारने, हंटर से मारने, घोड़े के खुर से मारने जैसे गंभीर उकसाव से भी जब शाहाबादी सत्याग्रही पीछे नहीं हटे, तब उनपर घोड़ा दौड़ाया गया था। सभी जिलों के सत्याग्रही भाग गए। वह चौगाई के सरदार हरिहर सिंह ही थे, जिनके नेतृत्व में शाहाबादी सत्याग्रही घोड़ों के टॉप के बीच डटे रहे। “अमृत बाजार पत्रिका” में ‘ब्रेभ वालंटियर्स ऑफ़ शाहाबाद’ शीर्षक से समाचार छपा था। इस सुअवसर पर राजेंद्र प्रसाद ने हरिहर सिंह को “सरदार” की मानद उपाधि प्रदान की थी।