पटना संग्रहालय के पाटलिपुत्र दीर्घा में 22 सौ साल पुरानी मूर्ति

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पटना – पटना संग्रहालय के पाटलिपुत्र दीर्घा की तरफ गैलरी में प्रथम विश्व का हथियार और लकड़ी के तलवार को सुरक्षित रखा गया है. प्रथम विश्वयुद्ध से पहले इस्तेमाल किये जाने वाले बन्दूक का वजन लगभग 30 से 40 किलो था. इसमें गन पाउडर भरा जाता था. संग्रहालय में बंदूक के साथ तलवार, चाकू रखा हुआ है. गैलरी में ही ईरानी टाइल्स, लकड़ी का तलवार और आदिवासियों का मॉडल शो-केश में रखा गया है. पाटलिपुत्रा दीर्घा के अन्दर ही प्रथम शताब्दी ईसा पूर्व 21 सौ साल पुराना बलुआ पत्थर से निर्मित मिथुक आकृति, 22 सौ साल पुराना बलुआ पत्थर से निर्मित पुरुष कबंध, प्रथम शताब्दी ईसा पूर्व बलुआ पत्थर से निर्मित स्थापत्य खंड, सफ़ेद पत्थर से निर्मित माप-तौल बाट रखा गया है. माप-तौल बाट किस सदी का है इसका पता नहीं चल सका है.

पाटलिपुत्र दीर्घा के अंदर डेनियल छपाई दीर्घा है. अंग्रेजों के निर्देश पर थॉमस और विलियम डेनियल ने भारत के प्रसिद्ध स्थानों की तस्वीर बनाई थी. दीर्घा में 250 साल पुरानी 1784 में बनी लगभग 67 तस्वीर को देखा जा सकता है, जिसमें ताजमहल, लालकिला, बनारस का घाट सहित देश के ऐतिहासिक जगहों की पेंटिंग रखी हुई है. डेनियल छपाई दीर्घा के अंदर ही डॉ. राजेन्द्र संग्रह दीर्घा है. जिसमें भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद से जुड़ी स्मृति चिन्ह, कपड़े, अभिनंदन पत्र, विदेशों से उपहार सुरक्षित रखे गये हैं. विभिन्न राज्यों से प्राप्त धातु से निर्मित चीजें, विभिन्न अवसरों पर पहने गये गाउन रखे हुए हैं.