पटना के व्हाइट पिलर हाउस से इंग्लैंड तक जाता था खाद्य पदार्थ

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पटना – राजधानी पटना में डच वास्तु शैली में निर्मित, स्तंभों वाला मकान काफी फेमस था. यह शुभ्र श्वेत मकान दीघा की बाटा फैक्ट्री के प्रबंधक का निवास था. ‘व्हाइट पिलर हाउस’ के नाम से प्रसिद्ध इमारत अपने विस्तृत लॉन के कारण और भी खूबसूरत लगती थी. इस इमारत को गवर्नर जनरल माक्वेर्ज ऑफ़ हेस्टिंग्स, जिन्हें लॉर्ड मोइरा के नाम से जाना जाता था.

1814 में चित्रकार सीताराम के साथ यहाँ आये थे. सीताराम ने आसपास के दृश्यों के साथ इस मकान का वृहत चित्रण किया. लॉर्ड हेस्टिंग्स ने इस कलाकार को 1814-1815 के दौरान कोलकाता से दिल्ली की अपनी यात्रा के चित्र बनाने के लिए साथ रखा था. अभिलेखों के अनुसार यह सुन्दर इमारत एक अंग्रेज व्यापारी मि. हवेल की थी, जो उस समय के अग्रणी सैन्य ठेकेदारों में से थे और फोर्ट विलियम तथा दानापुर छावनियों को सामान सप्लाई करते थे. अफीम के एक एजेंट पर चार्ल्स डॉयली ने लिखा है, ‘ हवेल अपने फॉर्म पर मांस का प्रसंस्करण करते थे जो कलकत्ते में बिकता था और वाइन बनाने का प्रयोग भी किया था.

यह इमारत दानापुर टाउनशिप के बाहर पटना के दीघा में स्थित है. बाद में इस इमारत के कई मालिक हुए. इसके पहले मालिक ब्रिटिश थे. जिन्होंने इसे चैनपुर के राजा को बेच दिया था. फिर राजा ने इसे खरीद लिया. नामचीन लेखक विक्रम सेठ के बचपन का कुछ समय यहाँ बीता.

इतिहासकार के अनुसार अभी व्हाइट पिलर हाउस बाटा के अंदर ही है. 1830-32 के आसपास यहाँ से काफी व्यापारिक गतिविधियाँ होती थी. यहाँ से बीफ से लेकर चटनी तक तैयार होता था. वाइन भी यहाँ बनता था. करीब एक हजार लोग यहाँ काम करते थे. यहाँ पर बना हुआ सामान देश के कोने-कोने तक जाते थे. इंग्लैंड तक यहाँ से बने हुए सामान जाते थे. मछली भी पैक होकर इंग्लैंड जाता था.