जेपी आंदोलन का मुख्य केंद्र था गांधी स्मारक निधि भवन

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पटना – कदमकुआँ स्थित कांग्रेस मैदान के ठीक सामने जेपी आंदोलन का कार्यालय था स्मारक निधि भवन. भारत छोड़ो आंदोलन के बाद १९७४ में जेपी क्रांति का मुख्य कार्यालय स्मारक निधि में हुआ करता था कार्यालय. भवन के तहखाने में गुप्त बैठक होने के साथ आन्दोलन के लिए रणनीति बनती थी. भवन कर्पुरी ठाकुर से लेकर लालू, नीतीश, शिवानन्द तिवारी, सुबोधकांत सहायक जैसे नेताओं का अड्डा हुआ करता था. जयप्रकाश नारायण गांधी स्मारक निधि के अध्यक्ष हुआ करते थे. देखा जाए तो आज के राजनेताओं की पाठशाला निधि में चला करती थी.

अलमारी में है कई दुर्लभ पुस्तकें

भवन के दुसरे तल्ले पर बने कमरे में लकड़ी के कई आलमारी मौजूद है जिसमें गांधी और अंबेडकर, रामायण, भारत छोड़ो आन्दोलन के सेनानी, शिक्षा और समाज, क्रांति साधक लोक नायक जयप्रकाश नारायण, चंपारण सत्याग्रह की कहानी, हिन्दी स्वाराज, गांधी, चरित्र और राष्ट्र निर्माण, सत्य के प्रयोग अथवा आत्मकथा, गांधी क्या चाहते थे जैसी कई दुर्लभ पुस्तकें बंद है.

आंदोलनों से जुड़ी जानकारी प्राप्त करने वाले शोधार्थी को पुस्तक मांगने पर उपलब्ध होता है. लोक नायक जयप्रकाश के मार्गदर्शन में संपूर्ण क्रांति आन्दोलन का दिशा इसी भवन से की गई थी. आपात काल के बाद देश में जनतंत्र को पुनर्जीवित करने के लिए लोकतंत्र की सबसे बड़ी विजय बिहार में हुई थी.

कमरे में आंदोलन से जुड़े सामान का था संग्रह

बरामदे से ठीक सटे कमरे में जेपी आंदोलन से जुड़े बैनर, पोस्ट, पंपलेट आदि का संग्रह भवन में रहता था. आंदोलन के समय क्रांतिकारी कमरे से पुतला, पर्चे-पोस्टर आदि लेकर क्रांग्रेस मैदान एंव अन्य जगहों की ओर रुख करते थे. देश में आपात काल लगने के बाद पुलिस बल की टुकडी भवन में आकर सारे पोस्टर और जेपी आंदोलन से जुड़ी कागजात को लेकर अपने साथ लेकर चले गए थे.

भवन के पहले तल्ले पर आज भी जेपी द्वारा स्थापित संस्था बिहार प्रदेश लोक समिति का कार्यालय मौजूद है जिस निधि भवन की बरामदे में बैठकर नेताओं ने राजनीति का ककहारा सीखा आज भी भवन उनके आने और उद्धार की राह जोह रहा है. लेकिन अभी तक इस ओर किसी का ध्यान नहीं गया है.

आंदोलन का मुख्य केंद्र हुआ करता था भवन

सफेद और हल्के पीले रंग से रंगा गांधी स्मारक निधि भवन के उपर चरखे की आकृति उकेर गई है, जो गांधी के सिद्धांतों को बयां करती करती है. जेपी आंदोलन से जुड़े कई बड़े नेता भवन में आकर रुकते थे. जेपी आन्दोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले भवन के अंदर तहखाना है. जहां आन्दोलन के समय पुलिस से बचने के लिए इसका प्रयोग किया जाता था. क्रांतिकारी भवन के अंदर बंने तहखाने में बैठकर गुप्त बैठक होने के साथ संग्राम की योजनाएं बनती थी. काफी प्रयास के बाद भी कई बार पुलिस को बैठक की जानकारी मिल जाती थी. छापेमारी के दौरान पुलिस भवन के एक-एक कोने को छान मारती थी. पुलीस से बचने के लिए लोग तहखाने बने दूसरे दरवाजे से निकल कर भाग जाते थे.