22 सौ साल पुरानी कौन सी मंदिर है जहाँ की मूर्तियाँ खजुराहो से मिलती है?

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दिलीप कुमार

कैमूर – बैजनाथ धाम के तर्ज पर कैमूर जिले में भगवान भोलेनाथ की भव्य मंदिर है। जहां सावन के महीने में शिव भगवान को जल चढ़ाने के लिए श्रद्धालु बिहार ही नहीं बल्कि दूसरे राज्यों से भी आते हैं। यह मंदिर भभुआ मुख्यालय से 42 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस मंदिर के आस-पास रहने वाले लोग बैजनाथ गांव का नाम दे दिए हैं। लोगों का मानना है कि मंदिर में एक शिलालेख है। जिसमें पता चलता है यह मंदिर 22 सौ साल पुराना है। जिस पर मगध्वज जोगी नामक राजा का नाम भी लिखा हुआ है।

ग्रामीण बताते हैं कि मंदिर के आसपास मकान बनाने के लिए या किसी भी कार्य से खुदाई अगर की जाती है तो हर बार भगवान भोले का शिवलिंग या खजुराहो से मिलती हुई मूर्तियां निकलता है। आज भी सैकड़ों की संख्या में छोटे-बड़े शिवलिंग मंदिर में देखने को मिलता है, और मंदिर में खजुराहो से मिलती हुई कई पत्थर की मूर्तियां भी देखने को मिलता है।

लोगों के अनुसार इस मंदिर से जुड़ी किताब पटना संग्रहालय में आज भी मौजूद है। आज से कुछ वर्ष पूर्व पुरातत्व विभाग भी मंदिर और गांव का निरीक्षण एक बार करने आया था जिसका रिपोर्ट भी उसने सरकार को सौंपी थी, उसके बाद सरकार ने कोई पहल नहीं किया। यह मंदिर बहुत दूर-दूर तक विख्यात है। जिसके घरों में खुदाई के वक्त जो भी मूर्तियां या शिवलिंग मिलता है वह मंदिर में रख जाता है।

लगभग एक बीघे भूमि पर इस भव्य मंदिर की स्थापना हुई है। मंदिर से लगभग 100 मीटर की दूरी पर चार एकड़ भूमि में एक तालाब निर्मित है। जिसके चरों कोनों पर साधना कुंड बने हुए हैं। गर्भ गृह में बनी अप्सराओं की प्रतिमाओं से यह प्रतीत होता है कि यह मंदिर आदि काल का बना हुआ है।