390 साल पुराना है पादरी की हवेली !

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पटना – 390 साल पुराना है ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थल पादरी की हवेली का इतिहास. 1628 में ईसाई समुदाय के लोगों द्वारा पटना स्थित पादरी की हवेली चर्च की स्थापना की गयी थी. मुगल साम्राज्य में बादशाह जहाँगीर के शासन काल में चर्च की स्थापना हुई थी. यह पटना शहर का सबसे पुराना गिरिजाघर माना जाता है. इसकी निर्माण की कहानी बंगाल गजेटियर में भी दर्ज है.

गजेटियर से पता चलता है कि 1713 में पादरी की हवेली कापुचिन धर्मसंगियों द्वारा विकसित पूजा घर का निर्माण कराया गया था. वहीं स्वतंत्रता आंदोलन के समय 1763 में अंग्रेजों एवं बंगाल के नवाब मीर कासिम के सिपाहियों के बीच युद्ध हुआ था. जिसमें काफी सारे अंग्रेज सैनिकों के साथ भारतीय सैनिक भी मारे गए थे. जिन्हें बाद में पटना सिटी के गिरिजा अस्पताल के समीप कब्रिस्तान में दफन कर दिया गया था. युद्ध के दौरान ही गिरिजाघर को काफी क्षति पहुंची थी. कुछ समय बाद 1763 से फिर से पूजा-अर्चना शुरू किया गया.

फादर जोसेफ द्वारा 1772 से 1779 के बीच पादरी की हवेली गिरिजाघर का निर्माण नए सिरे से हुआ. इसी दौरान नेपाल नरेश पृथ्वी नारायण के पुत्र बहादुर शाह द्वारा वर्ष 1782 में अष्टधातु से निर्मित विशाल घंटा गिरिजाघर में भेंट स्वरुप दिया गया. अष्टधातु के घंटे आज भी मौजूद है जिस पर सुनहरे अक्षरों में ‘मरिया’ नाम अंकित है.

पादरी की हवेली महागिरजाघर बिहार का सबसे पुराना गिरजाघर है. क्रिसमस के मौके पर यहाँ श्रद्धालुओं की काफी भीड़ रहती है. यहाँ सभी धर्मों के लोग प्रार्थना करने आते हैं. क्रिसमस के पूर्व से ही हवेली रौशनी से जगमगा उठती है.