आज भी सुरक्षित है सिन्हा लाइब्रेरी में भारतीय संविधान की प्रतिलिपि

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पटना भारतीय संविधान की प्रतिलिपि सिन्हा लाइब्रेरी में आज भी सुरक्षित है. हाथों से लिखी गयी संविधान की यह प्रतिलिपि दुर्लभ दस्तावेजों में से एक है, जिसे लाइब्रेरी ने काफी सहेज कर रखा है. यूँ तो भारत के संविधान की मूल कॉपी मध्य प्रदेश के ग्वालियर के सेंट्रल लाइब्रेरी में संरक्षित है. लेकिन इसकी प्रतिलिपि हू-ब-हू मूल प्रति की तरह है. इसमें जवाहर लाल नेहरु, राजेन्द्र प्रसाद, सच्चिदानंद सिन्हा के हस्ताक्षर भी देख सकते हैं.

इसके अलावा मोहनजोदडो, वैदिक काल, मुगल काल से लेकर आधुनिक भारत के कुल 22 चित्रों का सुंदर समायोजन भी किया गया है. लाइब्रेरी ने इसे धरोहर के तौर पर संरक्षित रखा है. लेकिन युवाओं में इसे देखने की ललक बहुत अधिक है. सिन्हा लाइब्रेरी के पास संविधान की अंग्रेजी की प्रतिलिपि है, जिसमें कुल 500 सुनहरे पन्ने हैं. संविधान का मसौदा तैयार करने वाली समिति ने हिंदी और अंग्रेजी दोनों में हस्तलिखित प्रतियां तैयार की थी. हिंदी संस्करण को गवर्नमेंट कॉमर्स प्रेस के एक कर्मचारी वसंत कृष्ण वैद्य ने तैयार किया था, जिसकी झलक सिन्हा लाइब्रेरी में देखने को मिल सकती है. यह प्रति हाथों से लिखे होने के साथ कैलीग्राफड भी है. जिसके कारण इसकी खूबसूरती देखने बनती है. इसमें किसी तरह की टाइपिंग या प्रिंट का इस्तेमाल नहीं किया गया है.

प्रतिलिपि की खासियत है कि इसमें भारत के पहले राष्ट्रपति राजेन्द्र प्रसाद, प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु, संविधान सभा के प्रथम अध्यक्ष सच्चिदानंद सिन्हा के हस्ताक्षर आज भी वैसे के वैसे हैं. यह दुर्लभ इसलिए भी है, क्योंकि जब संविधान की मूल कॉपी बनकर तैयार हुई थी तब सच्चिदानंद सिन्हा की तबियत खराब हो गई थी. तब उनके हस्ताक्षर के लिए मूल प्रति को दिल्ली से विशेष विमान से पटना लाया गया था. इसके साथ बिहार के 36 अन्य सदस्यों के भी हस्ताक्षर शामिल हैं.