जोधारा सिंह की अंग्रेजों को चुनौती

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सन 1857 की क्रांति को मुख्य रूप से सैनिकों का विद्रोह माना जाता है. लेकिन ऐसे भी व्यक्ति थे, जिन्होंने खुलकर ब्रिटिश शासन के विरुद्ध जनता का नेतृत्व किया और उसी उद्देश्य से बाजाप्ता युद्ध की घोषणा की. ऐसे व्यक्तियों में जोधारा सिंह का नाम उल्लेखनीय है. जिन्होंने गया के उत्तर-पश्चिम के इलाके में आजादी का बिगुल बजाया था. वह अंग्रेजी राज का नामोनिशान मिटा देने के लिए कृत संकल्प थे.

अंग्रेजों ने पुलिस का एक दस्ता उनके विरुद्ध भेजा. लेकिन जोधारा सिंह के हाथों वह बुरी तरह पिटा. अपने घर पर ही जोधारा सिंह ने मोर्चा बनवाया था. उनका घर खमिनी गाँव में था. विद्रोहियों ने नवादा और शेर घाटी चौकियों को अपने अधिकार में ले लिया. भागलपुर के सैनिक भी दो बार विद्रोह कर चुके थे. उन्होंने गया जेल का फाटक तोड़ दिया और बिहार शरीफ के मुन्सिफ की हत्या कर दी. इन विद्रोहियों का दस्ता टेकरी गया और फिर वहां से उन्होंने सोन की राह पकड़ ली.

शाहाबाद में जून 1858 में कुँवर सिंह के सैनिकों ने सोन पार कर अरवल के क्षेत्र को अपने अधिकार में ले लिया. जेल के टूटने की बात जोर पकड़ती जा रही थी. इसलिए 156 कैदियों को शेर घाटी भेजा जाने लगा. लेकिन रास्ते में उनके गार्ड्स ने विद्रोह कर दिया. अफसर को गोली मार दी गई और जेल के कैदी छोड़ दिए गये. 22 जून को विद्रोही गया पहुंचे और वहां भी जेल के कैदी छोड़ दिए गये. जहानाबाद थाने पर आक्रमण हुआ. सरकारी कचहरियां जला दी गयीं और दारोगा की हत्या कर दी गई.

कप्तान रॉट्री लाचार था. जोधारा सिंह बढ़ते गये और रफ़ी गंज के समीप पहाड़ों पर चढ़ गये. कासमा के पहाड़ी दर्रों में जोधारा सिंह को पकड़ पाना बहुत कठिन था. आखिर जमकर लड़ाई हुई, जिसमें अंग्रेज बहुत कठिनाई से जीत पाए.