भूख ने ली एक युवती की जान

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मुजफ्फरपुर: बिहार के मुजफ्फरपुर के मड़वन प्रखंड के बंगड़ी गांव की 15 साल की एक लड़की ने भूख से दम तोड़ देने का मामला सामने आया है। साथ ही परिवार के अन्य लोग भी भूख से मौत के कगार पर है।

बताया जाता है कि इस गांव के दिव्यांग हरेन्द्र साह का पूरा परिवार दाने-दाने को मोहताज है लेकिन सरकार की तमाम योजनाएं उसके घर तक आते आते दम तोड़ रही हैं। लाचार हरेन्द्र की बेटी सोनी की मौत को जिला प्रसाशन बीमारी बताने में जुटा है।

पीड़ित परिवार के हालात इतने बुरे थे कि आसपास के लोगों के चंदा देने और मुखिया के तीन हजार रुपए देने के बाद गुरुवार की सुबह कफन का जुगाड़ हुआ तब कहीं जाकर उसका अंतिम संस्कार हो सका। पीड़ित परिवार के साथ ही पड़ोसियों का दावा है कि उसके घर में अन्न का एक दाना भी नहीं था।

सुत्रों के मुताबिक इसके घर में पिछले कई दिनों से घर का चूल्हा नहीं जला है। जानकारी के मुताबिक दिव्यांग हरेन्द्र साह की 18 वर्षीय पुत्री सोनी कुमारी की तबियत विश्वकर्मा पूजा के दिन ज्यादा खराब हो गई थी। परिवार उसे पीएचसी में ले गया, जहां डॉक्टरों ने खून की कमी बताते हुए उसे खून चढ़ाने के लिए एसकेएमसीएच रेफर कर दिया।

पैसे के अभाव में सोनी के परिजन उसे एसकेएमसीएच नहीं ले जा सके और उसकी मौत हो गई। लोगों के मुताबिक हरेन्द्र के परिवार में यह तीसरी मौत है जो भूख से हुई है।

परिवार का आंसू पोंछने के लिए अफसरों के साथ खाकी और खादी सब पहुंच गये जिन्हें देखने के लिए भीड़ जुट गयी। आनन फानन में एक रिपोर्ट करके परिजनों से दस्तखत और निशान भी लिए गये जिसमें सोनी की मौत की वजह लंबी बीमारी बताई गयी लेकिन परिवार और समाज चीख-चीख के सोनी की मौत का कारण भूख बता रहा है।

सोनी की मौत के बाद इस परिवार पर सिस्टम इतना मेहरबान हो गया है कि बोरियों में भरकर अनाज हरेन्द्र के आंगन में पहुंचा दिया गया।