कैसे हुई बुढ़वा होली की शुरुआत ?

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पटना – बिहार की होली का अपना ही महत्व है. राज्य के विभिन्न हिस्सों में रंगों का यह त्योहार अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है. मगध की धरती पर होली के अगले दिन बुढ़वा होली का प्रचलन है. उस दिन लोग वाद्य यंत्र के साथ होली खेलते हुए जुलूस के साथ बाहर निकलते हैं जिसे झुमटा कहते हैं. होली की गीतों को गाते हुए लोग होली मनाते हैं.

हालांकि बुढ़वा होली की शुरुआत के बारे में स्पष्ट तौर पर कुछ बता पाना मुश्किल है. किंवदंती के अनुसार मगध में जमींदारी प्रथा थी. होली के दिन जमींदार बीमार पड़ गए. जमींदार जब स्वस्थ हुए तो उनके दरबारियों ने होली फीकी रहने की बात कही, जिसपर जमींदार ने दूसरे दिन भी होली खेलने की घोषणा कर दी. इस तरह से होली के दूसरे दिन मगध में बुढ़वा होली की शुरुआत हुई.

इस दिन लोग रंग और गुलाल में डूबे रहते हैं. लोग तरह-तरह की पकवानें बनाकर एक-दूसरे को खिलाते हैं. कुछ लोग तो कीचड़-गोबर मिट्टी से होली का आनंद लेते हैं. जाति-धर्म से ऊपर उठकर लोग इस पर्व को मनाते हैं.