कुश्ती की अपनी पुरानी परंपरा रही है: मुख्यमंत्री

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पटना: भारतीय कुश्ती महासंघ के तत्वावधान में बिहार कुश्ती संघ द्वारा 21 से 23 जनवरी तक पाटलिपुत्र स्पोर्ट्स काॅम्पलेक्स कंकड़बाग में आयोजित 36वीं जूनियर राष्ट्रीय बालक तथा 19वीं जूनियर राष्ट्रीय बालिका कुश्ती प्रतियोगिता के समापन समारोह के अवसर पर देश के 28 राज्यों से आये पहलवानों एवं खेल प्रेमियों को संबोधित करते हुये मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने कहा कि मैं सबसे पहले राष्ट्रीय स्तर के कुश्ती प्रतियोगिता के आयोजन के लिये विधायक श्री ददन यादव उर्फ ददन पहलवान और कुश्ती संघ के पदाधिकारियों को बधाई देता हूं कि पटना में इस तरह का आयोजन किया गया।

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उन्होंने कहा कि कुश्ती हर गांव की चीज है। कुश्ती की अपनी पुरानी परंपरा रही है। पटना से सौ किलोमीटर दूर राजगीर मगध साम्राज्य की राजधानी हुआ करती थी। पौराणिक युग में जरासंघ राजा थे। आज भी जरासंघ का अखाड़ा वहां दिखाई देता है और वहां की मिट्टी भी अलग किस्म की है। कहा जाता है कि मिट्टी में दूध डाला जाता था और आज भी वहां की मिट्टी का रंग सफेद है। उन्होंने कहा कि देश में कुश्ती का पुराना इतिहास है। यह पाटलिपुत्र की धरती है। गुप्त और मौर्य काल में पाटलिपुत्र राजधानी हुआ करती थी। उन्होंने कहा कि मुझे खुशी है कि खेल के लिये राष्ट्रीय स्तर के स्टेडियम का निर्माण हमलोगों के कार्यकाल में पूरा हुआ। यहां खेल के लिये हर तरह की व्यवस्था करने की कोशिश की गयी है। बिहार में खेल को प्रोत्साहित करने के लिये नीति बनाई गई है। उन्होंने कहा कि भ्रमण के दौरान जब ग्रामीण इलाके में युवा स्टेडियम की मांग करते हैं तो मुझे खुशी होती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के युवाओं में पढ़ने और खेल-कूद के प्रति गहरी दिलचस्पी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के सेवाओं में खिलाड़ियों को विशेष प्राथमिकता देकर नियुक्त करने का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि जब वे रेल मंत्री थे तो खेल को प्रोत्साहित करने हेतु नियुक्ति में खेल कोटा का दुगुना से ज्यादा कर दिया गया था, जिससे खिलाड़ियों में खेल के प्रति उत्साह आया। उन्होंने कहा कि हमारी कोशिश है कि युवा अच्छा करें किन्तु कभी-कभी अफसोस होता है कि देश की आबादी सवा सौ करोड़ है किंतु ओलंपिक एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतियोगिता में देश को एक-दो पुरस्कार ही मिल पाता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर खेल को बढ़ावा देने की नीति होनी चाहिये। उन्होंने कहा कि बिहार में हमलोग प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर का अन्तर्राष्ट्रीय मानक के अनुरूप स्पोर्ट्स अकादमी बिहार के राजगीर में स्थापित करने जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कुश्ती प्रतियोगिता में देश के 28 राज्यों ने हिस्सा लिया, इसके लिये आयोजकों को बधाई देता हूं। उन्होंने कहा कि फाइनल प्रतियोगिता आज देखने का अवसर मिला। सभी पुरस्कार विजेताओं को बधाई देता हूं और कामना करता हूं कि वे अपना नाम रौशन करें, देश का नाम रौशन करें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 1 अप्रैल 2016 से बिहार में शराबबंदी लागू की गयी। शराबबंदी के बाद माहौल बदल गया। पहले जहां गांवों एवं शहरों में शराब के कारण अशांति का माहौल था, शाम को शराब पीने के बाद झगड़ा-झंझट करते थे, आज स्थिति बदल गयी है। शराबबंदी लागू होने के बाद अब वही लोग हंसते-मुस्कुराते हुये घर आते हैं और साथ में सब्जी भी लाते हैं। अब हम शराबबंदी से नशामुक्ति की ओर जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि 21 जनवरी को मानव श्रृंखला के जरिये लोगों ने शराबबंदी एवं नशामुक्ति के पक्ष में अपनी भावना प्रकट की। हमलोगों का आकलन था कि दो करोड़ लोग भाग लेंगे। 21 जनवरी को तीन बजे अपराह्न तक जो आंकड़े प्राप्त हुये, उसके अनुसार तीन करोड़ लोगों ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि लेागों में इतना उत्साह था कि जो रूट तय नहीं थे, उस पर लोग श्रृंखला बनाकर खड़े हो गये। बाद में जो जानकारी मिल रही है, वह संभव है कि चार करोड़ लोगों ने मानव श्रृंखला में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि 2011 की जनगणना के अनुसार बिहार की आबादी 10 करोड़ 36 लाख है। अनुमानित जनसंख्या वृद्धि दर के आधार पर 2017 में साढ़े ग्यारह-बारह करोड़ बिहार की आबादी मानी जा सकती है और उसमें चार करोड़ से ज्यादा लेागों की भागीदारी एक विशिष्ट और अभूतपूर्व घटना है। उन्होंने कहा कि शराबबंदी और नशामुक्ति के पक्ष में इतनी बड़ी शुरूआत हो गयी है। उन्होंने पहलवानों से कहा कि आप सबलोग पहलवान हैं, अगर कोई पहलवान मादक द्रव्य खायेगा या शराब का सेवन करेगा तो क्या वह कुश्ती लड़ पायेगा। इससे छुटकारा पाना चाहिये, बिहार ने तो छुटकारा पा लिया। उन्होंने देश के विभिन्न राज्यों से आये हुये पहलवानों एवं खेलप्रेमियों से आह्वान किया कि आपलोग देश के कोने-कोने से आये हैं, इसकी चर्चा अन्य राज्यों में भी होनी चाहिये। यहां केरल के लोग भी आये हैं, केरल ने कहा है कि दस साल में शराबबंदी लागू करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सब ऐसे नहीं होता, अगर लागू करना है तो कर दो। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों का कहना था कि शराबबंदी से सरकार को पांच हजार करोड़ रूपये की राजस्व हानि हो गयी, मैं इसे हानि नहीं मानता बल्कि बिहारवासियों का दस हजार करोड़ रूपये बच रहा है और इसका उपयोग वे अच्छे कार्यों के लिये कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि शराबबंदी के बाद सिलेसिलाये कपड़ों की बिक्री 44 प्रतिशत बढ़ गयी है। सिलाई मशीन की बिक्री में 19 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। उन्होंने कहा कि आप सबलोग युवा हैं, आप जहां-जहां से आये हैं, इस भावना का प्रचार-प्रसार कीजियेगा। बिहार ने मानव श्रृंखला के जरिये जो नजीर पेश किया है, मैं नहीं समझता कि दुनिया में ऐसी कोई मानव श्रृंखला सामाजिक कार्य के लिये कभी बनी हो।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार का इतिहास सिर्फ बिहार का नहीं बल्कि पूरे भारत का इतिहास है और कई मायनों में तो यह मानव सभ्यता का इतिहास है। उन्होंने कहा कि खेल- कूद को पूरे तौर पर बढ़ावा देना चाहिये। बिहार में युवा देश में सबसे अधिक हैं और युवाओं पर ही देश का भविष्य निर्भर करता है।

इसके पूर्व मुख्यमंत्री ने कुश्ती के महिला एवं पुरूष वर्ग फाइनल मैच देखा और विजयी पहलवानों को पुरस्कृत किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री को कुश्ती संघ द्वारा बड़े फूलों के माला से भव्य स्वागत किया और प्रतीक चिह्न एवं पगड़ी देकर सम्मानित किया।

समारोह को विधायक श्री ददन यादव उर्फ ददन पहलवान ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर महासचिव भारतीय कुश्ती महासंघ केरल श्री बी0एन0 प्रसाद, महासचिव बिहार कुश्ती संघ श्री कामेश्वर सिंह, देश के विभिन्न राज्यों से आये हुये अर्जुन पुरस्कार विजेता पहलवानगण, कला, संस्कृति एवं युवा विभाग के प्रधान सचिव श्री चैतन्य प्रसाद, मुख्यमंत्री के सचिव श्री मनीष कुमार वर्मा, जिलाधिकारी पटना श्री संजय कुमार अग्रवाल, जदयू नेता श्री छोटू सिंह, देश के विभिन्न राज्यों से आये हुये पहलवानगण एवं बड़ी संख्या में खेल प्रेमी उपस्थित थे।