मोकामा में बन्द पड़े मिलों को अडानी और अम्बानी को पीएम चलाने के लिए कहें – नीरज सिंह

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पटना – प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पटना के बाद आज मोकामा जाएँगे जहां वे पटना शहर के लिए 738.04 करोड़ रुपये की लागत वाली चार सीवरेज परियोजनाओं और 195 कि.मी. लम्‍बी 3031 करोड़ लागत वाली चार राष्‍ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे।

उनके आने से पहले जेडीयू ने प्रधानमंत्री से मांग की है कि वे बन्द पड़े उद्योग-धंधों को शुरू करें, साथ ही किसानों के लिए भी कुछ करें। जेडीयू प्रवक्ता नीरज सिंह ने कहा कि बन्द पड़े मिलों को चलाने के लिए अडानी और अम्बानी को प्रधानमंत्री इन्हें चलाने के लिए कहें। साथ ही जेडीयू के प्रवक्ता ने अनुरोध किया है कि पीएम रोग का इलाज करें ना कि रोगी को ही मारें।

मोकामा के सबसे पुराने रेलवे वैगन बनाने वाली कंपनी भारत वैगन एन्ड इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड को 1978 में पीएसयू बनाकर शुरू किया गया था पर आज ये बन्द कर दिया गया है। मज़दूर और कर्मचारी परेशान हैं। करीब 300 परिवार का भरण-पोषण होता था इस कंपनी से चलता था।

यही हाल एनटीसी यानी नेशनल टेक्सटाइल्स कॉर्पोरेशन का है जो बन्द है। कैंपस वीरान पड़ा है।

चक्रधर प्रसाद सिंह कभी इस मिल के जेनरल फिटर थे, अब ये चौकीदार का काम कर रहे हैं। यहाँ कभी 500 कर्मचारी कपड़ा बनाते थे। अब ना सूत है और ना ही कपड़ा बस चारो तरफ घास का जंगल है। चक्रधर का सवाल है कि अब जब नीतीश-मोदी साथ हैं, तब अगर विकास नहीं होगा, तो कब होगा।

मोकामा का टाल क्षेत्र मसूर दाल की उपज के लिए जाना जाता है पर केंद्र सरकार की गलत नीति ने इसका कमर तोड़ कर रख दिया है। हाल के वर्षों में जूता-चप्पल बनाने वाली बाटा कंपनी भी बन्द हो गई। शराब बनाने वाली कंपनी मैकडोवेल तो बन्द है ही।

टाल विकास समिति के संयोजक आनंद मुरारी ने बताया कि एक लाख छः हज़ार हेक्टेयर क्षेत्र में डेढ़ से दो लाख टन पिछले दो साल से गल्ला पर जमा है। इस साल का उपज अलग है। 3200 से 3500 रुपया प्रति क्विंटल का भाव है जो लागत से कम है। लागत मूल्य से आधा है बाजार में भाव। न्यूनतम समर्थन मूल्य दलहन में प्रभावी नहीं है। खेसारी और मटर का कोई खरीदार नहीं है। 6 लाख टन खपत है दलहन का देश में पर विदेश से आयात होता है जिससे किसान परेशान हैं।