NMCH में जूनियर डॉक्टर की हड़ताल के कारण पांच वर्षीय बच्ची की इलाज के अभाव में मौत

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पटना – नालंदा मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में जूनियर डॉक्टर की हड़ताल के कारण पांच वर्षीय बच्ची की इलाज के आभाव में मौत हो गई। अस्पताल में एम्बुलेंस नहीं रहने के कारण परिजन कंधे पर शव को लाद कर ले जा रहे है। मृत बच्ची धनरुआ थाना क्षेत्र की रहने वाली है। बिच्छू काटने पर इलाज के लिए परिजनों ने लाया था NMCH।

NMCH में हड़ताली जूनियर डॉक्टर ने सीनियर डॉक्टर को मरीजों का इलाज करने से रोका। जूनियर डॉक्टरों ने इमरजेंसी सहित सभी वार्डो में घूम कर इलाज बंद करवाया। वहीं जब NMCH के अधीक्षक से मरीज की मौत पर सवाल किया गया तो इन्होंने जो जवाब दिया वो सुनकर होश उड़ जायेंगे, उन्होंने कहा कि घर में खाना नहीं मिलता है तो अस्पताल आ जाते हैं खाना खाने।

बता दें कि नालंदा मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में मंगलवार की रात मरीज को लेकर परिजनों ने काटा जमकर बवाल। यह कोई पहली बार नहीं जब मरीज के परिजनों के द्वारा अस्पताल पर आक्रोश दिखा है। दरअसल, एक मरीज को इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया था लेकिन जब डॉक्टरों ने देखा तो मरीज को मृत घोषित कर दिया गया जिसपर परिजनों ने डॉक्टर पर दबाव बनाया कि मृत मरीज को इलाज कर जिंदा करे।

मामला तब गंभीर हो गया जब परिजन गुंडागर्दी पर उतर गए और जूनियर डॉक्टरों के साथ जमकर की मारपीट और गोलीबारी। हालांकि किसी तरह की नुकसान की कोई खबर नहीं है। बदसलूकी से गुस्साए डॉक्टर हड़ताल पर चले गए। डॉक्टरों ने 24 घन्टे की अवधि के अंतराल असामाजिक तत्वों की गिरफ्तारी की मांग की थी। उन्होंने साफतौर पर कहा था कि अगर इन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया तो इसके विरोध में एनएमसीएच, पीएमसीएच, और डीएमसीएच के डॉक्टर्स भी हड़ताल पर जाएंगे और काम ठप करेंगे। पीएमसीएच जेडीए अध्यक्ष डॉ विनय ने दोषियों की गिरफ्तारी और मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने की मांग की है।

वहीं आये दिन अस्पताल मेँ डॉक्टरों के साथ मारपीट की घटना को लेकर एनएमसीएच प्रशासन के द्वारा इमरजेंसी के गेट को तोड़कर बंद गेट लगाने का काम किया जा रहा है। तो वहीं इमरजेंसी वार्ड सहित दूसरे कई वार्डों मेँ सीनियर डॉक्टरों के द्वारा मरीजों का इलाज और उन्हें देखा जा रहा है। जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल जारी है।