बाढ़ की चपेट में गांव

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दिलीप कुमार

कैमूर – जिला के रामगढ़ विधानसभा में आदर्श बड़ौरा पंचायत का आंटडिह गांव कर्मनाशा और दुर्गावती नदी के चपेट में आने से गांव चारों तरफ पानी से घिर गया है। गांव के आधे से अधिक घर पानी मे डूब गए हैं। लोग पानी से बचने के लिए अपने मवेशी के साथ विद्यालय में शरण लिये हुए हैं। बाढ़ हर साल आता है गांव में। गांव के लोग आज सरकार से और सभी नेताओं से विकास की आशा भी छोड़ चुके हैं। कहने के लिए तो गांव को सांसद अश्वनी चौबे आदर्श गांव घोषित कर चुके हैं, लेकिन विकास के नाम पर उस गांव को एक सड़क भी नसीब नहीं है। उस गांव की आबादी लगभग 32 सौ है। गांव में अधिकांश गरीब और दलित बस्ती के लोग रहते हैं। जो आज बाढ़ की चपेट में आकर विवश होकर विद्यालय में शरण लिए हुए हैं।

विद्यालय के शिक्षक बताते हैं कि यहां हर साल जब भी नदियों में पानी आता है तो गांव के लोग अपना जानवर और अपना जरूरी सामान विद्यालय में लेकर चले आते हैं, और विद्यालय का पठन-पाठन बाधित हो जाता है। लेकिन हम लोग इनको शरण देते हैं। क्योंकि वे जाएं तो कहां जाएं। उनके घरों में तो पानी घुसा रहता है और ये विद्यालय ऊँचाई पर है। जो सबको शरण लेने में काम आता है। चाहे वो जानवर हो या इंसान। इस गांव में इतना पानी आने का कारण है कि यहाँ पर दो नदियों का मिलन है। जिससे हमेशा यहाँ का हाल यही रहता है। बरसात के मौसम में यदि कोई बीमार हो जाता है तो इस गांव से सिर्फ और सिर्फ मरीज को ले जाने का साधन नाव है।

वहीं गांव वाले बताते हैं कि हम लोग औरत और मर्द अलग-अलग दिशा में नाव के सहारे सुबह-शाम शौच करने जाते हैं और नाव के ही सहारे हम अपने जानवरों को दूसरे गांव से हरा चारा लाने का काम करते हैं। ग्रामीण बताते हैं कि जब भी चुनाव आता है सारे नेता इस गांव में आते हैं और कहते हैं हमें वोट दो, हमें वोट दो लेकिन इस संकट की घड़ी में हम लोग के बीच कोई भी नहीं आता। वही दूसरी तरफ उस गांव में देखने को मिला की जो दलित बस्ती के बच्चे हैं उनमें भी नाराजगी दिखा कि हम लोग का विकास नहीं हुआ, उस गांव में विकास के नाम पर कुछ भी नहीं। क्योंकि जिस गांव में जाने के लिए सड़क ही ना हो उस गांव का विकास कैसे होगा।

जबकि प्रधानमन्त्री मोदी के सांसद अश्वनी चौबे ने कैमूर जिले में खुले मंच से अनाउंस किया था बड़ौरा पंचायत को आदर्श गांव बनाने के लिए और सांसद कोटे से विकास करने के लिए। आजादी के बाद आज तक उस गांव में तो विकास हुआ नहीं। उस गांव के लोगों ने किसी भी लोगों से विकास होने की आशा ही छोड़ दी है।