गुजरात से लौटे बिहारियों की दर्दभरी आपबीती

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दिलीप कुमार

कैमूर – गुजरात से आए हुए कैमूर मोहनिया थाना क्षेत्र के डड़वा में जब दो लोगों के परिवार से जानकारी ली तो परिवार वालों के आँखों में अपनी आपबीती बताते हुए आंसू आ गए। लोगों ने बताया कि गुजरात में बिहारियों को हीन दृष्टि से देखा जाता है। बिहार में कोई काम न मिलने के कारण लोग गुजरात के सूरत में पहुंच गए और वहां हीरा की फैक्ट्री में काम करने लगे।

आने वाले राजू और अयोध्या सिंह ने बताया कि 10 से 15000 रूपये महीना पर हम लोग वहां काम करते थे, लेकिन गुजरात में हुए बवाल को लेकर जो परेशानी झेलनी पड़ी किसी तरह 1000 के टिकट को दो-दो हजार में खरीदकर बसों में खड़ा होकर और ट्रेन में लटक कर अपने घर तक पहुंचे अब हमारे बीच से रोजगार तो समाप्त हो ही गया अब देखना है कि घर कैसे चलता है।

वहीं राजू के परिवार में एक भाई आंख से अंधा है और विधवा मां। घर में जिस परिवार में कमाने वाला मात्र एक राजू है वो भी गुजरात में हुए बवाल को लेकर अपने घर मोहनिया डड़वा पहुंचे। वहीं अयोध्या सिंह के परिवार वाले बताते हैं कि न्यूज़ और टीवी पर जब खबर ऐसा चल रहा था कि बिहार के लोगों पर गुजरात के लोग मारपीट कर रहे थे तो परिवार बहुत चिंतित था। 15000 की नौकरी करने वाले अयोध्या सिंह ने आनन फानन किसी भी तरह से पैसा अधिक से अधिक खर्च कर टिकट लिया और 3 तारीख को अपने घर पहुंच गए। घर में बूढ़ी मां सहित 12 सदस्यीय परिवार है जिसमें कमाने वाले मात्र एक अयोध्या सिंह थे।

अयोध्या सिंह की मां का कहना है कि हम लोग का परिवार का रोजी रोटी कैसे चलेगा। गुजरात गए हुए उस गांव के लोग हैं सब के परिवार काफी चिंतित है और चाहते हैं कि जल्द से जल्द वो लोग अपने घर आ जाए। जब मामला शांत हो जाएगा तब देखा जाएगा कि गुजरात सूरत जाने लायक है कि नहीं। तब तक इस इलाके में काम कर किसी तरह अपने परिवार का लालन-पालन करेंगे।