यह आंगनबाड़ी केंद्र है या कपड़े की दुकान !

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दिलीप कुमार

कैमूर – आंगनबाडी केंद्र में चलता है दुकान यह हम नहीं कह रहे ये तस्वीर बयां कर रही है. रामपुर प्रखंड के अमाव में आंगनबाड़ी केंद्र में चलता है कपड़े की दुकान और आंगनबाडी चलता है सेविका के घर में. मामला यह है कि आंगबाडी केंद्र के भवन बनाने के लिए आया और भवन बना कि आंगनबाड़ी केंद्र चलेगा आंगनबाड़ी सेविका भी अपने नए भवन से खुश थी कि अचानक भवन पर ग्रहण लग गया. गाँव के जावेद अख्तर ने आकर आंगनबाडी खाली करा दी यह बोलते हुए कि मेरे जमीन में आंगनबाड़ी बना है मुझसे बिना पूछे कैसे बना. उस दिन से आंगनबाडी केंद्र में कपड़े दुकान चलता है.

जिला प्रशासन भी फाईलों की तलाश में जुट गई क्योंकि आंगबाडी भवन बनाते समय जमीन का एन.ओ.सी नहीं लिया गया. अंचलकर्मी भी सर्वे नहीं कराया कि जमीन बिहार सरकार की है कि निजी है. अब जिला प्रशासन बड़ी फेर में फंस गई कि किया क्या जाए? क्योंकि भवन 5 लाख के लागत से बना है वो भी निजी जमीन में जिसके कारण भवन पर जमीन मालिक का कब्जा है.

जमीन मालिक का साफ कहना है कि मेरे जमीन में भवन तो पहले बनना नहीं चाहिए अगर बन गया तो सरकार के 5 लाख रूपये के राजस्व का क्या होगा. अब आंगनबाड़ी केंद्र के भवन के लिए फिर दुबारा पैसे आवंटन नहीं होगी. आंगनबाड़ी में दुकान की खबर की चर्चा पूरे जिले में फ़ैल चुकी है. हर जगह यही चर्चा चल रही है कि सरकारी पैसे का दुरूपयोग हुआ है. जिला प्रभारी डीएम ने मामले की जाँच कर कार्रवाई की बात कही है.

आंगनबाड़ी केंद्र में कपड़े की दुकान चल रहा है जिसको लेकर ग्रामीण कई बार प्रशासन से गुहार लगाया कि जमीन की नापी कर लिया जाए कि भवन जो बना है किसी के निजी जमीन में है या बिहार सरकार में. नए भवन होने के बाद भी केंद्र सेविका के घर पर चल रहा है. जावेद अख्तर का कहना है कि मैं बाहर रहता था जब घर पर आया तो देखा कि मेरे जमीन पर आंगनबाड़ी केंद्र बन गया तो मैंने उसमें कपड़े की दुकान खोल दी क्योंकि मेरे निजी जमीन में हमसे बिना पूछे भवन कैसे बना? अंचल के कर्मी आए थे तो मैने अपना जमीन का कागज दिखाया.

इस मामले में जब जिला प्रभारी डी.एम से बात की गई तो उनका कहना था कि आपके माध्यम से जानकारी हुई है मामले की जाँच कराई जाएगी और दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी कि आंगनबाडी के भवन में कपड़े की दुकान कैसे चल रही है.

सवाल यह है कि आंगनबाडी केंद्र में जहाँ नौनिहालों को पढ़ाया सिखाया जाता है वहाँ कपड़े की दुकान है? जबकि किसी सरकारी भवन बनाने के लिए अंचल से एन.ओ.सी लेने पड़ते हैं. बिना एन.ओ.सी के भवन का निर्माण कैसे हुआ? 15 साल से भवन बना है जिसमें गाँव के जावेद अख्तर का कब्जा है, अख्तर का कहना है कि मेरे जमीन में भवन कैसे बना अगर बना है तो मेरा क्या दोष? अब देखना होगा कि आंगनबाडी में बच्चे पढ़ते हैं कि दुकान चलता रहेगा?