गोद में बेटी, फिर भी बैंकिंग सेवा में डटी रहती हैं कंचन

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खगड़िया: बिहार के खगड़िया जिला के इलाहाबाद बैंक की कर्मचारी ने अपने परेशानियों के बावजूद पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर एक उदाहरण पेश की है। जब भी देश के सामने जब-जब चुनौतियां आई हैं तब-तब देश के नागरिकों ने एकजुटता से उसका मुकाबला किया है। मुकाबले में हर हमेशा पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर महिलाओं ने भी साथ दिया है।

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खगड़िया जिला के इलाहाबाद बैंक में काम करने वाली कंचन रोज रोज अपने सात माह की बेटी पंखुड़ी को लेकर बैंक आती है। भीड़ से जूझती है। और अपने फर्ज को निभाती है। उनका कहना है कि जब देश काला धन से परेशान है। उस समय हमारे देश के मुखिया ने फैसला लिया कि हमें एक लड़ाई लड़नी है। यह एक ऐसी लड़ाई है जिसमें बैंक कर्मियों को महती भूमिका निभानी है। इसलिए मैं तैयार हूं। देश और समाज की सेवा के लिए।

कंचन बताती हैं कि सबुह 8 बजे से हीं बैंक आने की तैयारी में लग जाती हैं। बच्चे को साथ लाती हैं। कहा बैंक में दूध और सारे इंतजाम वो साथ लाती हैं। ताकि बच्चे को किसी तरह की परेशानी नहीं हो। बीच-बीच में वह जब भी ब्रेक होता है वह बच्चे को कुछ खिला देती हैं। दिनभर तो जमा और निकासी में बीत रहा है।

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शाम बैंक बंद होने के बाद कागजी काम निबटाया जाता है। इसलिए रात जाते-जाते 9 बज हीं जा रहा है। ऐसे में वह बैंक में हीं वॉकर रखती हैं ताकि बच्चे को सोने में कोई परेशानी नहीं हो। वो कहती हैं कि बैंक के ग्राहक हीं हैं जो बैंक को सफल बनाते हैं।

कंचन को इस चुनौती से निबटने में बैंक के कर्मचारी भी सहयोग करते हैं। बैंक के लोगों का कहना है कि ऐसी स्थिति है कि छुट्टी का नामोनिशान नहीं है। हमें मिलकर अपना फर्ज निभाना है। इसलिए सभी कंचन प्रभा के जज्बे को सलाम करते हैं और उन्हें सहयोग करते हैं।

वहीं बैंक के शाखा प्रबंधक सुमन कुमार सिन्हा कहते हैं कि कंचन जैसे कर्मचारी इलाबाद बैंक की शान हैं। हमलोग हर संभव मदद दे रहे हैं। यह वह समय है जब हर बैंकर को अपना बेस्ट देना है। कंचन स्वत: आगे आ रही हैं। यह बैंक के दूसरे कर्मचारियों के लिए प्रेरणादायी बात है।

श्रोत : हिन्दुस्तान