अब लालू को भोले का सहारा

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पटना: लालू यादव के आवास पर आज सुबह से सावन के पवित्र महीने के दूसरे सोमवारी को अपने परिवार पर चारो तरफ से आये संकट को दूर करने के लिए और बाबा भोलेनाथ की असीम कृपा पाने के लिए रुद्राभिषेक कराया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार रुद्राभिषेक पूजा कराने के लिए बनारस और देवघर से विद्वान पंडित आए हैं।रुद्राभिषेक में लालू यादव के बड़े पुत्र स्वास्थ्य मंत्री तेजप्रताप, डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव और अन्य सदस्य इस पूजा में शामिल हुए। मालूम हो की लालू यादव के बड़े पुत्र तेजप्रताप धार्मिक प्रवृति के हैं। उनका पूजा-पाठ पर अटूट विश्वास है।

अभी कुछ दिनों से लालू प्रसाद यादव के परिवार पर चारो तरफ से संकट मंडरा रहा है। एक तरफ राजनीतिक उत्तराधिकारी डीप्टी सीएम की कुर्सी जाती दिख रही है तो दूसरी तरफ इनकम टैक्स, ईडी, और सीबीआई का दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में लगता है कि इन सब चीजों से उबरने का एक ही उपाय बचा है बाबा भोले के शरण में जाकर रुद्राभिषेक कराना।
आइये बताते हैं क्यों रुद्राभिषेक कराया जाता है अर्थात रूद्र का अभिषेक करना यानि कि शिवलिंग पर रुद्र मंत्रों के द्वारा अभिषेक करना। जैसा की वेदों में वर्णित है शिव और रुद्र परस्पर एक-दूसरे के पर्यायवाची हैं। शिव को ही रुद्र कहा जाता है। क्योंकि- रुतम्-दु:खम्, द्रावयति-नाशयतीतिरुद्र: यानि की भोले सभी दु:खों को नष्ट कर देते हैं। हमारे धर्मग्रंथों के अनुसार हमारे द्वारा किए गए पाप ही हमारे दु:खों के कारण हैं। रुद्राभिषेक करना शिव आराधना का सर्वश्रेष्ठ तरीका माना गया है। रूद्र शिव जी का ही एक स्वरूप है। रुद्राभिषेक मंत्रों का वर्णन ऋग्वेद, यजुर्वेद और सामवेद में भी किया गया है। शास्त्र और वेदों में वर्णित है कि शिवजी काअभिषेक करना परम कल्याणकारी है।

रुद्रार्चन और रुद्राभिषेक से हमारे पातक से पातक कर्म भी जलकर भस्म हो जाते हैं और साधक में शिवत्व का उदय होता है तथा भगवान शिव का शुभाशीर्वाद भक्त को प्राप्त होता है और उनके सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं। ऐसा कहा जाता है कि एकमात्र सदाशिव रुद्र के पूजन से सभी देवताओं की पूजा स्वत: हो जाती है। रूद्रहृदयोपनिषद में शिव के बारे में कहा गया है कि- सर्वदेवात्मकोरुद्र: सर्वेदेवा: शिवात्मका: अर्थात सभी देवताओं की आत्मा में रूद्र उपस्थित हैं और सभी देवता रूद्र की आत्मा है।