लालू और उनके लाल रोज़ तलाश रहे नीतीश के खिलाफ सृजन में आरोप, गढ़ रहे नए तर्क

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पटना – राजद अध्यक्ष लालू यादव और उनका परिवार भले ही कानूनी शिकंजे में फंसता जा रहा हो लेकिन वे अपने विरोधियों को ढील देने के लिए कतई तैयार नहीं। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी को सृजन घोटाले के लिए किन-किन बिन्दुओं पर आरोपित किया जा सकता है इसके लिए पिता-पुत्र खूब मशक्कत कर रहे हैं, हालांकि अभी तक कोई ठोस सबूत हासिल नहीं हो पाया, फिर भी प्रयास जारी है। ऐसा ही एक प्रयास लालू और तेजस्वी ने आज भी किया संवाददाता सम्मेलन करके जिसमें कागजों के द्वारा ये बताने की कोशिश की गई कि नीतीश और मोदी इसमें दोषी क्यूँ हैं। इस बात को साबित करने के लिए इसी महीने की 10 तारीख को रैली भी हो चुकी है पर जिस धमाके की बार-बार बात कही जा रही है, उस विस्फोट का इंतज़ार सबको है। पर लालू ने धमकी जोरदार दे दी है – कहा है कि जब तक नीतीश कुमार और सुशील मोदी पर एफ़आईआर दर्ज नहीं हो जाता, हम दम नहीं लेंगे।

लालू-तेजस्वी बार-बार 2008 की कैग रिपोर्ट का ज़िक्र कर रहे थे। इस पर सवाल ये है कि कैग रिपोर्ट की कॉपी तो आरजेडी विधायकों को भी दी गई होगी, उस समय पीएसी के चेयरमैन आरजेडी के ही अब्दुल बारी सिद्दीक़ी थे, फिर उस समय क्यों नहीं इसे गंभीरता से देखा गया? 2015 में दुबारा सरकार में आने पर क्यों नहीं कार्रवाई की गई? पत्रकारों के इस सवाल पर लालू-तेजस्वी गोल-मोल जवाब देते रहे। दोनों का आरोप है कि चेक बाउन्स शुरू होने के बाद ही नीतीश कुमार पर बीजेपी दबाव बनाने लगी और आख़िरकार नीतीश ने महागठबंधन तोड़ कर बीजेपी से हाथ मिला लिया। पूरे मामले में उनका मुख्य आरोप ये है कि चेक बाउन्स होने की तारीखें, बिहार में मचे राजनीतिक घमासान और नीतीश कुमार की अंतरात्मा जागने का समय एक ही है। अगर उनकी बातें सच हैं भी तो इस बाबत कोई ठोस सबूत उनके पास भी नहीं है। आज जो भी बयान दिए गयें, वे ये साबित करने के लिए काफी नहीं कि नीतीश मोदी की इसमें संलिप्तता है। जो बयान आए उनमें से कई बातें लोग बार-बार सुन चुके हैं।

पत्रकारों ने लालू परिवार की जो प्रॉपर्टी कूर्क हुई है उस पर भी सवाल पूछा पर लालू-तेजस्वी ने इसे टाल दिया, लालू ने तेजस्वी से मज़ाक़िया लहजे में कहा कि पत्रकारों को अलग से समझाएँ इस मामले के विषय में।

अब लालू ने आज क्या-क्या कहा ये पढ़िए…

# जिस तरह से सरकारी धन की लूट हुई है, उससे भागलपुर की जनता में काफ़ी बेचैनी है। मैं वहां एक रात रुका था और हम लोगों के हाथ कई काग़ज़ात लगे हैं।

# नीतीश के ‘आत्मघाती नुक्कड़ नाटक’ वाले बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि हम जनता के प्रतिनिधि हैं, विपक्ष हैं और जनता घोटाले की जानकारी चाहती है।

# सुशील मोदी नीतीश कुमार के स्टेपनी हैं।

# जिस तरह से नीतीश तेजस्वी को पब्लिक डोमेन में जाने की बात कहते थे, उसी तरह वो भी जाएँ।

# नीतीश के प्रवक्ता जगदानंद, शिवानंद तिवारी को देते हैं गाली, अभी तो हमने दिया है हल्का टैबलेट, रिएक्शन दिखना शुरू।

# सृजन स्कैम की जानकारी जनता को देनी पड़ेगी, चेहरा छिपाने के लिए सुमो से पीसी करवाते हैं नीतीश।

# जब 10 जुलाई, 2017 से ही चेक बाउन्स होना शुरू हो चुका था फिर 3 अगस्त तक नीतीश ने इस घोटाले को क्यों छिपाया? 10 जुलाई से 26 जुलाई के बीच नीतीश कुमार लगातार दिल्ली के चक्कर लगाते रहे। नीतीश कुमार हमको मर्यादा का पाठ पढ़ा रहे हैं जैसे वो हमारे हेडमास्टर हैं। मैं पलिटिकल सायन्स का स्टूडेंट रहा हूँ और नीतीश कुमार इंजिनीयरिंग किए थे, इस घोटाले में उन्होंने अपनी इंजिनीयरिंग का इस्तेमाल किया है।

# नीतीश कुमार ऊंगली दिखाकर बड़ी बातों को झूठलाते हैं

अब पढ़िए तेजस्वी ने क्या-क्या कहा ….

# नीतीश कुमार पर बीजेपी का ज़बरदस्त दबाव था, उनके पास दो ही रास्ते थे कि या तो वो जेल जाएँ या फिर गठबंधन तोड़ें। नीतीश कुमार सृजन घोटाले में फँसने वाले थे इसीलिए बीजेपी के साथ उनकी डील हुई।

# नीतीश कुमार सबसे बड़े नैतिक भ्रष्टाचारी हैं। 10.7.17 से 29.7.17 तक चेक बाउन्स हुआ, इसी बीच नीतीश कुमार दिल्ली दौरा कर रहे थे और अंत में सरकार गिरा दी। 2006 में ही तत्कालीन ज़िलाधिकारी ने सृजन के सभी प्राजेक्ट्स को रोककर सारा सरकारी पैसा वापस करने का आदेश दिया था फिर दुबारा से पैसों के ट्रान्स्फ़र का आदेश किसने दिया था? आख़िर कैसे 2017 तक ये घोटाला चलता रहा? नीतीश कुमार प्रेस और जनता के सामने स्पष्टीकरण क्यों नहीं दे रहे हैं।

# मुख्य आरोपियों को भगाया गया, क्यों नहीं अमित, प्रिया की गिरफ्तारी की गई ?

# मंडल की रहस्मय तरीके से की गई हत्या

# नीतीश उनके साथ बैठ गए जो उनकी छाती तोड़ने की बात करते थे, अब देखना है कौन किसकी छाती तोड़ता है?

# क्या बात है कि नीतीश सुशील मोदी को बार-बार डिप्टी सीएम बनाते हैं?

# सबौर प्रखंड में जनसभा की अनुमति नहीं दी गयी, सरकार नहीं चाहती है कि RJD घोटाले को उजागर करे।

# राज्यपाल भी उन्हीं दो दिन बिहार में मौजूद थे जब सरकार बनाने का खेल चल रहा था जबकि उनको बिहार का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था, ये ऐसे तो नहीं हो सकता, ये पहले से ही तय था।

# नीतीश कुमार ने हमारी जनसभा को नुक्कड़ नाटक बोलकर लोकतंत्र का अपमान किया है।

# नीतीश कुमार ख़ुद तो मीठा-मीठा बोलते हैं लेकिन अपने प्रवक्ताओं को सुबह-सुबह फ़ोन करके बताते हैं कि क्या बोलना है।

# हम सुप्रीम कोर्ट जाएंगे पर जनता को बताना भी जरुरी ।

नीचे दी गए डॉक्युमेंट्स वे हैं जिनमें सृजन के घोटालों का ज़िक्र पहले ही किया गया था, साथ ही वो बैंक स्टेटमेंट है जिससे कि ये साफ़ है कि 10 जुलाई से ही सरकारी चेक बाउन्स होना शुरू हो चुके थे, और यही वो समय है जब बिहार में राजनीतिक घमासान मचा हुआ था। ये सभी आज पत्रकारों को लालू-तेजस्वी की तरफ से दिया गया.

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