आइए ढेर सारी किताबें पढ़ें

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जिंदगी बहुत छोटी है ये सब जानते हैं …पर हम पुस्तक प्रेमियों से पूछिये कि इसका मतलब क्या है ! इसका मतलब इस सच्चाई के साथ जीना है कि आप कितनी भी कोशिश कर लें वो सारी किताबें नहीं पढ़ पाएंगे जिसकी आपकी दिल में तमन्ना होगी. अगर हम ये माने कि कोई इंसान औसतन ६० साल जीएगा तो भी वह अपनी बाक़ी जिम्मेदारियों को निभाते हुए शायद 3-४००० ही किताबें पढ़ पाएगा. जिस रफ्तार से किताबें सदियों से लिखी जाती रही हैं किसी भी किताबों से इश्क करने वाले के लिए ये बेहद कम है. उस पर भी ये कैसे तय किया जाए कि अगर इतनी ही पढ़ी जा सकती हैं तो वे कौन सी हैं जिन्हें पढ़े बिना नहीं रहा जा सकता. इसलिए हमनें सोचा कि ऐसा कोई प्लेटफोर्म या जगह जरुर होना चाहिए जहां इन सब चीजों की चर्चा की जाए.

पुस्तक प्रेम एक गज़ब सी चीज़ है, इस प्रेम में जो है वो समझ पाएगा कि हर किताब उसके लिए क्या होती है. हर किताब की शुरुआत और उसके अंत तक हम उसके किरदारों के साथ जीते हैं. ये जीना वही महसूस कर सकता है जो किताबों के प्यार में गिरफ्तार हो. कोई अच्छी पुस्तक जब ख़त्म की जाती है तो उसका हैंगओवर कई दिनों तक रहता है. उस पुस्तक से छूटने का गम कोई साधारण गम नहीं होता. ऐसा महसूस होता है मानों किसी ने उन किरदारों को मौत दे दी और आप कुछ नहीं कर पाए. इस भावना को वे सभी लोग बहुत अच्छे से समझेंगे जिनके जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा किताबों के इर्द-गिर्द जिया जाता है.

भले ही पैसों की तंगी हो, किताबें जरुर खरीदी जाती हैं. ये प्रेमी उनके साथ सोते-जागते हैं. ऐसे में कितना अच्छा हो अगर हर कोई जितनी मर्जी किताबें पढ़ सके, उनके बारे में बातें कर सके और दूसरों से ये जान सके कि कौन सी वो पुस्तक है जो उसे पढ़नी है. कितना अच्छा हो अगर सभी समूह में एक तय समय-सीमा के लिए किसी एक ही लेखक के किताबों को पढ़ें और फिर उसके बारे में बातें करें. कितना अच्छा हो कि जो किताब आप पढ़ना चाहें, वो आपको खरीदनी भी नहीं पड़े. कुछ ऐसा ही हम करना चाहते हैं पर ये तभी संभव होगा जब आप सभी साथ आएँगे. वो जिन्दगी ही क्या जिसमें साहित्य और संगीत न हो, ये दोनों विधाएं हमें सही मायने में इंसान बनाती हैं, इंसान होना क्या होता है वो आप पुस्तकें पढ़ कर जान सकतें हैं. यही नहीं कई घरों में बच्चों के मन में इसके प्रति रूची जगाने की कोशिश नहीं की जाती जिससे वे एक बेहद खुशगवार अनुभव से वंचित रह जाते हैं. हम सभी को यह कोशिश करनी चाहिए कि छुटपन से ही बच्चों की दोस्ती स्कूली किताबों के अलावा भी और पुस्तकों से करवाई जाए. इस तरह वो दुनिया को देखने के लिए एक व्यापक नज़रिया पाएंगे और अपने व्यक्तित्व को भी सम्पूर्ण रूप से विकसित कर पाएंगे.

किसी ने बहुत अच्छा कहा है कि ज्ञान बांटने से बढ़ता है – इसलिए मैं अपनी सारी किताबें लोगों के पढ़ने के लिए इस पुस्तकालय में रख रही हूँ इस उम्मीद के साथ कि कई लोग इसका फ़ायदा उठाएंगे और पुस्तकालय को बेहतर बनाने में मदद करेंगे. ये कोशिश इस लिए भी की जा रही है क्यूंकि पटना में पुस्तकालयों की बेहद कमी है. ये एक छोटा सा प्रयास है, कितना सफल होगा ये आप सभी पुस्तक प्रेमियों पर निर्भर है.

अगर आप इसके सदस्य बनना चाहते हैं तो आप इन फोन नंबरों पर संपर्क करें – 8797929088, 8507281877.

नोट: – अगर आप प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं तो आपके लिए यह पुस्तकालय वरदान साबित होगा – यहाँ कई अखबार, पत्रिकाएँ भी नियमित रूप से उपलब्ध हैं. अगर आगंतुकों की संख्या बढ़ती है तो पुस्तकालय की किताबों, पत्र/पत्रिकाओं में लगातार वृद्धि की जाएगी.

– वैसे लोग जो अपनी किताबें दान में देना चाहते हैं वे भी यहाँ दान दे सकते हैं. हमारी कोशिश है कि किताबों की पहुँच उन लोगों तक जरुर बनाएं जो आर्थिक तंगी की वजह से पुस्तके आदि नहीं खरीद सकते.

– पुस्तकालय सेवा का लाभ आप मात्र २५० रु प्रति माह पर ले सकते हैं. हालांकि आपको फिलहाल यहीं बैठकर पढ़ना होगा. भविष्य में हम पुस्तक निर्गत करने की सेवा भी शुरू करेंगे.