महाबोधि वृक्ष पूरी तरह स्वस्थ, वन अनुसंधान विभाग की देख-रेख में रासायनिक छिड़काव

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अजीत

गया वर्ल्ड हर्रिटेज में सम्मिलित महाबोधि मंदिर में पहुँची एफआरआई की टीम महाबोधि वृक्ष के स्वास्थ्य जाँच के लिए आए फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिक, महाबोधि वृक्ष का किया निरीक्षण। IMG-20170729-WA0008

वैज्ञानिकों के देख-रेख में किया गया महाबोधी वृक्ष पर दवाई का छिड़काव, सूखी टहनियों को काट कर लगाई गई रसायनिक लेपIMG-20170729-WA0007

गया: वर्ल्ड हर्रिटेज में सम्मिलित महाबोधि मंदिर में एफआरआई (फॉरेस्ट रीसर्च इंस्टिट्यूट) की टीम के दो वैज्ञानिक बोधगया पहुँचे। दो सदस्यीय टीम ने महाबोधि मंदिर पहुँचकर महाबोधि वृक्ष की स्वास्थ्य जाँच की तथा आवश्यक दवाओं का छिड़काव किया। महाबोधि वृक्ष का किया निरीक्षण और वैज्ञानिकों के देख-रेख में की गई महाबोधी वृक्ष पर दवाई छिड़काव। सूखी टहनियों को काट कर लगाई गई रसायनिक लेप। वन अनुसंशाधन विभाग, देहरादून के वैज्ञानिकों ने बताया कि पवित्र महाबोधि वृक्ष पूरी तरह से स्वस्थ है तथा यह भी देखा जा रहा है कि महाबोधि मंदिर परिसर में अन्य पीपल के वृक्ष से महाबोधि वृक्ष को कोई नुक्सान तो नहीं है। उन्होंने बताया कि अन्य वृक्षों से बोधि बृक्ष को किसी तरह का कोई नुकसान नहीं है क्योंकि सभी वृक्षों के कीटाणु कुछ एक को छोड़कर अलग-अलग होते हैं। बोधि वृक्ष की सूखी और बेकार पड़ी टहनी को काटकर उसमें रासायनिक लेप लगाया गया ताकि किसी प्रकार के कीटाणु और फफूंदी से बचाया जा सके और आस्था का यह बोधि वृक्ष रोग मुक्त रहे। ज्ञात हो कि महाबोधि वृक्ष की सुरक्षा का जिम्मा वन अनुसंशाधन विभाग, देहरादून के जिम्मे है और विभाग के वैज्ञानिक वर्ष में दो बार यहां आकर बोधि वृक्ष के स्वास्थ्य की देखभाल और आवश्यक दवाओं का छिड़काव करते रहते हैं।