आद्री द्वारा मार्क्स पर पांच दिवसीय सम्मेलन

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पटना – ‘‘मार्क्सवाद आज उस तरह से जीवंत नहीं है जैसा पूर्व की दो सदियों में था। लेकिन आज भी कार्ल मार्क्स के विचार पूरी दुनिया में मानव मस्तिष्क की बुद्धि, कल्पना और विवेक को जिन परिप्रेक्ष्यों में आकर्षित करके रखते हैं, वे निस्संदेह काफी विविधतापूर्ण हैं।’’ पटना आधारित समाजविज्ञान की शोध् संस्था आद्री चाहेगी कि आप इस पर विश्वास करें। वर्ष 2018 में कार्ल मार्क्स की द्विशतवार्षिकी पर आद्री ने उनको याद ही करने का नहीं, उनसे संबंधित समस्त बातों पर पुनर्चिंतन और छानबीन करने का भी विचार किया। इसी मकसद से आद्री द्वारा ‘कार्ल मार्क्स – जीवन, विचार, प्रभाव: द्विशतवार्षिकी पर एक आलोचनात्मक परीक्षण’ विषय पर पटना में आगामी 16 जून से 20 जून तक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है।

कार्ल माक्र्स पर यह अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन पिजुशेंदु गुप्ता और राधा कृष्ण चौधरी की याद में आयोजित किया जा रहा है, जिन्होंने 1967 में बेगूसराय में मार्क्स की 150वीं जयंती पर इसी तरह का एक सम्मेलन का आयोजित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। जिसके विषय में उस समय प्रसि विद्वान मोहित सेन ने टिप्पणी की थी कि यह भारत में आयोजित होने वाला बेहतरीन और सबसे बड़ा सम्मेलन था। देवीप्रसाद चट्टोपध्याय एवं राम शरण शर्मा ने भी इस सम्मेलन में भाग लिया था। इस ऐतिहासिक विरासत ने दुनिया भर के सर्वश्रेष्ठ दिमागों का एक अच्छा संयोजन किया है ताकि मार्क्स के अलग-अलग विचारधरात्मक परिप्रेक्ष्य रखे जा सके और उनका गहरा प्रभाव हो।

आद्री के सदस्य सचिव डाॅ. शैबाल गुप्ता का सोचना है कि सम्मेलन की थीम सचमुच व्यापक है और इसमें होने वाले विचार-विमर्श में कई पहलू शामिल हो सकते हैं जैसे, उनका जीवन संघर्ष, वह और उनके आजीवन सहयोगी एंजेल्स, अर्थशास्त्र, इतिहास, समाजशास्त्र, राजनीतिक सिद्धांत, साहित्य और अन्य सामाजिक मुद्दों को समेटने वाला उनका विस्तृत लेखन कहें तो प्रथम इंटरनेशनल से शुरू करके उनकी राजनीतिक गतिविधियां या विद्वानों और राजनेताओं द्वारा मार्क्सवाद के नए क्षितिज खोलने वाली उनकी अकादमिक और राजनीतिक विरासत की निरंतरता।

गायत्राी स्पिवाक, सैमुअल हाॅलेंडर, समीर अमीन, जान टोपोरोव्स्की, जुलिओ बोलटविनि, एलविरा काॅनचेरो और रिकार्डो बेलोपिफयोर समेत अनेक विश्वविख्यात शिक्षाविद सम्मेलन में कुछ सर्वाध्कि दिलचस्प विषयों पर अपनी बातें रखेंगे। कोलंबिया विश्वविद्यालय की प्रोफेसर गायत्राी स्पिवाक का विषय होगा – ‘‘आज हम माक्र्सवाद का उपयोग कैसे कर सकते हैं?’’ टोरंटो विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त प्रोफेसर सैमुअल हाॅलेंडर के व्याख्यान का शीर्षक होगा – ‘‘कार्ल मार्क्स के क्रांतिकारी परिचय और मार्क्स-जाॅन स्टुअर्ट मिल के बौद्धिक संबंध पर’’। अभी सेनेगल में रहने वाले अर्थशास्त्राी समीन अमीन का विषय होगा – ‘‘साम्यवादी घोषणापत्रा ;1848द्, 170 वर्ष बाद’’। एसओएएस के प्रोफेसर जान टोपोरोव्स्की ‘‘ब्याज के शास्त्राीय सिद्धांत पर मार्क्स की गंभीर टिप्पणियां’’ विषय पर व्याख्यान देंगे। वहीं, बर्गामो विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रिकार्डो बेलोपिफयोर के व्याख्यान का शीर्षक होगा – ‘‘क्या मार्क्स पर जीवन है? – पूंजीवादी उत्पादन के वृहद-मौद्रिक सिद्धांत के बतौर राजनीतिक अर्थशास्त्र की एक आलोचना’’। पांच दिवसीय सम्मेलन में विश्व के सभी महाद्वीपों के कुल 53 शिक्षाविद भाग लेंगे।