विश्वविद्यालय में लटका ताला, छात्रों में उदासी

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मोतिहारी – महात्मा गांधी केन्द्रीय विश्वविद्यालय इन दिनों राजनीति का अखाड़ा बना हुआ है. एक तरफ कुलपति और विश्व विद्यालय के शिक्षक तथा छात्रों का मोर्चा खुला हुआ है. तो दूसरी तरफ विभिन्न राजनीतिक दलों की दखलंदाजी भी बढ़ गई है. यही नहीं विश्वविद्यालय के अन्दर जारी उथल-पुथल हिंसक रूप ले चुका है. लिहाजा, कुलपति ने केन्द्रीय विश्व विद्यालय अधिनियम 2009 में निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए यूनिवर्सिटी को अनिश्चित समय तक के लिए बंद कर दिया है. जिस कारण छात्र अपने सेमेस्टर को लेकर परेशान है, तो शिक्षक कुलपति को इन सारी परिस्थितियों के लिए जिम्मेवार मानते हुए विश्व विद्यालय के बंद होने पर दुःख जताया है.

महात्मा गांधी केन्द्रीय विश्वविद्यालय अपने स्थापना काल से ही विवादों में रहा है. कभी छात्र और कुलपति के बीच विवाद, तो कभी विश्व विद्यालय के शिक्षक और कुलपति के बीच विवाद के कारण विश्व विद्यालय परिसर हमेशा अखाड़ा बना रहा. इधर नया विवाद विगत 17 अप्रैल को हुआ. जब पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की मौत के बाद विश्वविद्यालय के समाज शास्त्र के सहायक शिक्षक संजय कुमार ने एक पोस्ट फेसबुक पर किया. जिसमे वाजपेयी जी को लेकर कुछ आपत्तिजनक बातें लिखी हुयी थी. इसी पोस्ट के बाद शिक्षक की कुछ युवाओं ने जमकर धुनाई कर दी. फिर इस मुद्दे पर राजनीति शुरू हो गई. इस मामले को लेकर पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए. इसी बीच विश्व विद्यालय के तनावपूर्ण माहौल का हवाला देते हुए कुलपति ने विश्व विद्यालय को अनिश्चित काल के लिए बंद कर दिया. जिस कारण छात्रों में नाराजगी दिख रही है. छात्र इस पूरे मामले की न्यायिक जांच की मांग करते हुए विश्व विद्यालय को जल्द खुलवाने की अपील कर रहे है. ताकि उनका पढाई प्रभावित नहीं हो सके.

इधर विश्व विद्यालय के शिक्षक भी संस्थान के इस माहौल से चिंतित है तथा कुलपति के कार्यशैली पर प्रश्न चिन्ह खड़ा करते हुए इन्हें हटाने की मांग कर रहे हैं. ताकि विश्व विद्यालय में शैक्षणिक माहौल बनाया जा सके. शिक्षकों ने कुलपति द्वारा विश्वविद्यालय को बंद किये जाने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया.

विश्व विद्यालय के अन्दर के इस पूरे मामले को राजनीतिक रूप दे चुके सूबे के पर्यटन मंत्री प्रमोद कुमार कुलपति द्वारा विश्वविद्यालय को बंद किये जाने का समर्थन किया है. उन्होंने उल्टा विश्वविद्यालय के मारपीट में जख्मी शिक्षक संजय कुमार को देशद्रोही बताते हुए उन्हें गिरफ्तार करने की मांग कर डाली. मंत्री ने शिक्षक को ही विश्वविद्यालय के ख़राब माहौल के लिए जिम्मेवार बता डाला.

बहरहाल, सियासत की भेंट चढ़ चुकी केन्द्रीय विश्वविद्यालय में ताला लटक चुका है और विश्वविद्यालय के गेट पर जिला पुलिस के जवान सुरक्षा की दृष्टि से दंगा रोधी वाहन के साथ कैम्प किये हुए है. इस परिस्थिति में उन छात्रों की चिंता किसी को नहीं है. जिन्होंने नए सत्र में नामांकन के लिए आवेदन किया है. साथ ही यह कोई नहीं बता रहा है कि उन छात्रो का क्या होगा. जिन छात्रों के अगले सेमेस्टर की पढाई विश्वविद्यालय के बंद होने से प्रभावित होगा और उनका एग्जाम भी अगले 10 सितम्बर से होने वाला है. अब देखना यही है कि कब विश्वविद्यालय की स्थिति सामान्य होती है और विश्वविद्यालय फिर से खुलता है.