फिसड्डी साबित हुआ आईएसओ प्रमाणित बिहारशरीफ सदर अस्पताल,एंबुलेंस नहीं मिलने से शव को हाथों में लेकर ही दर-दर भटकने को मजबूर दिखाई दिये मृतक के परिजन

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नालंदा – मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह क्षेत्र नालंदा में स्वास्थ्य विभाग एक बार फिर से शर्मसार दिखाई दिया है। दरअसल, छबीलापुर थाना क्षेत्र के लोहारबीघा गांव में एक महादलित परिवार के 10 वर्षीय बच्चे सौरभ कुमार की मौत ट्रैक्टर से कुचलकर हो गई थी। जिसके बाद परिजनों के द्वारा किसी तरह जुगाड़ कर बिहारशरीफ आईएसओ प्रमाणित सदर अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए लाया गया। पोस्टमार्टम के बाद महादलित परिवार एंबुलेंस नहीं मिलने से शव को हाथों में लेकर ही दर-दर भटकने को मजबूर दिखाई दिये।

परिजनों ने बताया कि शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद सदर अस्पताल में एंबुलेंस तो बहुत सारी देखी लेकिन कोई भी एंबुलेंस कर्मियों ने शव को घर तक पहुंचाने की जहमत नहीं उठाई। गौरतलब है कि जिले के 102 और 108 एम्बुलेंसकर्मी अपनी आठ सूत्री मांगों को लेकर गुरुवार से हड़ताल पर है। जिसका खामियाजा बेचारे मृतक के परिजन और मरीजो को उठाना पड़ रहा है। इन एंबुलेंसकर्मियों के हड़ताल का असर कहीं देखे या ना देखे लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार गृह क्षेत्र नालंदा में इसका असर साफ-साफ दिखाई देने लगा है। कहने को तो बिहारशरीफ सदर अस्पताल आईएसओ प्रमाणित अस्पताल है लेकिन सुविधा के नाम पर यह हमेशा से ही फिसड्डी साबित हुआ है।