नवपाषाण काल का साइट चिरांद की स्थिति गंभीर

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सारण: इस बार बिहार में आई विनाशकारी बाढ़ से काफी कटाव हुआ है। जिससे चिरांद के महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल को भी नुकसान पहुंचा है। बाढ़ के दौरान जल संसाधन विभाग की टीम ने इस स्थल का मुआयना किया था, लेकिन तब जलस्तर में काफी वृद्धि व तेज धार के कारण बचाव कार्य करना मुश्किल था।

बाढ़ का पानी कम होने पर जल संसाधन विभाग की चार सदस्यीय टीम ने शुक्रवार को फिर मुआयना किया। निरीक्षण के बाद टीम के सदस्यों ने बताया कि पूर्व में इस स्थल पर कटाव को रोकने के लिए जीयो बैग द्वारा कार्य कराया गया था लेकिन जलस्तर में इस बार काफी वृद्धि होने के कारण हुए कटाव से पुरातात्विक स्थल को काफी क्षति हो गयी है।

यह पुरातात्विक स्थल सारण ही नहीं बिहार की धरोहर है। इसे बचाना जरूरी है। जांच की रिपोर्ट वरीय पदाधिकारियों को सौंप इस स्थल की वस्तुस्थिति को बतायेंगे। साथ ही आगे बाढ़ से क्षति नहीं हो, इसके लिए विभाग आवश्यक कदम उठायेगा। टीम में जल संसाधन विभाग के सहायक अभियंता विद्यानंद प्रसाद, कनीय अभियंता सूर्यनाथ सिंह, कपिल मुनि उपाध्याय और कमलेश कुमार शामिल थे।

चिरांद के पुरातात्विक स्थल पर नदी के प्रहार के बाद गिरे व बिखरे हुए मलवे को हटाने के लिए स्थानीय लोगों ने बुलडोजर चलाना शुरू कर दिया। पुरातात्विक स्थल पर जो वस्तुयें इतिहास के पन्नों में एक नया अध्याय जोड़ सकती थीं, वे सड़कों में बिछायी जाने लगी हैं।

यहां नदी घाटी सभ्यता व संस्कृति के अवशेष मिले हैं। वहीं दस वर्षों की खुदाई से प्राप्त हजारों पुरावशेष इसकी प्राचीनता के गवाह हैं। ऐसे महत्वपूर्ण स्थल जिसको संरक्षित क्षेत्र कहा जाता है, उस पर जेसीबी मशीन से बाढ़ मे हुए कटाव के मलवे को सड़क बनाने के लिए वहीं दाबा जा रहा है। विभाग इस पर मौन है। कटाव स्थल के आसपास अभी भी जो चीजें बिखरी हैं, वे चिरांद को एक और नये अध्याय के साथ जोड़ सकती हैं, लेकिन दुर्भाग्य यह है कि यहां के लोग इसे हल्के में ले रहे हैं।

चिरांद निओलिथिक यानि नवपाषाण काल का महत्वपूर्ण साइट रहा है। यही नहीं बाद के दौर में भी इसका महत्व रहा है। चिरांद को दो चीजों के लिए जाना जाता है। पहला वहां से मिले हड्डी और पत्थर के बने औजार और दूसरा वहां से मिले पॉटरी। मिट्टी के बर्तनों पर खास तरह की पॉलिश की गयी है। औजारों में हथौड़ी, छेनी, ब्लेड, गोल छेद करने के उपकरण मिले हैं।

सभार : हिन्दुस्तान