नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने किया दावा, कहा- जनता ने दिया मौका तो करूंगा यह काम

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PATNA: नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी ने बुधवार को प्रदेश कार्यालय में आरजेडी अतिपिछड़ा प्रकोष्ठ के प्रदेश पदाधिकारियों और जिलाध्यक्षों की बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि लालू प्रसाद ने गरीब, अभिवंचित, शोषित, दबाए-सताए पिछड़े, अत्यंत पिछड़े, दलित, आदिवासी, अल्पसंख्यक समाज को सामाजिक न्याय दिलाने का काम किया था. मैं उनके आशिर्वाद और आपसब के सहयोग और समर्थन से इन वर्ग और तबकों को आर्थिक न्याय दिलाने का काम करूंगा. आरजेडी मात्र माई समीकरण की पार्टी नहीं है यह तो सभी वर्ग ,जाति, धर्म की पार्टी है. यहां पर सब को सम्मान, आदर मिलने के साथ साथ पार्टी और सत्ता में भागीदारी दी जाती है.

उन्होंने कहा कि लालू ने समाज के सभी वर्ग, जाति को विधानसभा और विधान परिषद में प्रतिनिधित्व दिया. आरजेडी तो A टू Z की पार्टी है. साज़िश के तहत आरजेडी को किसी विशेष जाति की पार्टी कह कर बदनाम किया गया है. लालू ने कभी भी अपनी नीति और विचारधारा से समझौता नहीं किया. गरीब, अभिवंचित, पिछड़े को समाज की मुख्य धारा मे लाने का प्रयास किया. पिछड़े, अत्यंत पिछड़े को उन्होंने समुचित प्रतिनिधित्व दिया.

तेजस्वी प्रसाद ने कहा कि आपने अगर मुझे सेवा का अवसर दिया तो मैं उनको, जिन्हें प्रतिनिधित्व (जातियों) का आज तक अवसर नहीं मिला है, उन्हें खोज कर देश के सबसे बड़े पंचायत में भेजूंगा. आपकी लड़ाई लालू जी और आरजेडी लड़ रही है. आरजेडी ने दल के अंदर भी आरक्षण की व्यवस्था की है. कोरोना काल में जब कोई नेता घर से निकल नहीं रहा है, वैसे समय मे भी आरजेडी के सिपाही जनता की सेवा से पीछे नहीं हटे. प्रवासी मजदूरों को अपने-अपने घर लाने के लिए गुहार लगाई और उन्हें घर पहुंचने में मदद की.

एक लाख से अधिक मजदूरों को राशन पहुंचाया. लालू रसोई चला कर लाखों गरीबों के लिए भोजन की व्यवस्था की. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मजदूरों को आने नहीं देना चाह रहे थे. उन्होंने पुलिस महकमे से मजदूरों के लिए अपमानजनक चिट्ठी निकलवाई. आरजेडी के विरोध के बाद वो चिट्ठी वापस हुई. उन्होंने कहा कि सरकार वो होती है जो लोगों के दुख दर्द में काम आए. मुख्यमंत्री की चिंता मात्र कुर्सी बचाने की है.

नेता प्रतिपक्ष ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि बीजेपी करोड़ों खर्च कर वर्चुअल रैली कर रही है. दूसरी ओर मजदूरों को 1500-2000 किलो मीटर पैदल चलने को मजबूर किया, जिसके परिणाम स्वरूप बड़ी संख्या में मजदूर दुर्घटना में मरे. उन्होंने कहा कि रेल की ऐसी बदइंतजामी रही की पटना के बजाय रेल पूरी पहुंच रही थी, जिस कारण मजदूरों को घर पहुंचने में 8-8 दिन लगा. उनके भूख प्यास को मिटाने के लिए समुचित व्यवस्था नहीं कि गई जब कि रेल टिकट के अतिरिक्त 50-50 रुपया भी मजदूरों से लिया गया. इस अव्यवस्था के कारण भी कई की जान गई.

कोरोना काल में बेरोजगार हुए मजदूरों को रोजगार दिया जाना था. मैं जानना चाहता हूँ कि कितने मजदूरों को रोजगार मिला और उन्हें रोजगार दिए जाने के लिये क्या कार्य योजना है सरकार उसे बताए. उन्होंने कहा कि पिछले 15 वर्षों मे रोजगार के सृजन के लिए कितने कल कारखाने खोले गए, 15 वर्षों मे कितने कल कारखाने बंद हुए यह भी सरकार बताए. बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने और विशेष पैकेज का क्या हुआ? उन्होंने ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाया और कहा कि राज्य में शिक्षा व्यवस्था चौपट हो गई है.