बाढ़ ने उत्पन्न की चारे की समस्या

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सुपौल – बाढ़ ने लोगों को तबाह कर रखा है, सरकार इसके मद्देनज़र काम में भी लगी है लेकिन रफ्तार इतनी सुस्त है कि कई जगहों पर लोग अब आशा ही छोड़ बैठे हैं. ऐसे में इंसान की तो बात ही छोड़ दीजिए, जानवरों की भी सुध लेने वाला कोई नहीं. इंसान तो जैसे-तैसे कुछ इंतज़ाम करके खा-पी कर अपनी भूख मिटा ले रहा है लेकिन जानवर क्या खाए क्यूंकि बाढ़ में चारे की समस्या गहराती जा रही है.

बाढ़ ने इंसान और जानवर में भेद ख़त्म कर दिया है लेकिन थोड़ा अंतर है. इंसान तो जुगाड़ कर अपनी भूख मिटा ले रहा है लेकिन सरकारी मदद के बिना जानवर बेचारे क्या करें — हर तरफ़ पानी ही पानी है, ऐसे में चारे की समस्या ज़बरदस्त रूप से खडी हो गई है. ऐसे कई परिवार हैं जो बाढ़ में किसी तरह से अपनी जान बचाने के साथ-साथ अपने जानवरों को अपने परिवार का अंग मान बचा कर तो ले आए लेकिन अब इनके चारे का इंतज़ाम कहाँ से करे. अपने जानवरों की चिंता से ऐसे कई परिवार हैं जो बाढ़ से बहाल हैं. सुपौल के बरियाही पंचायत के लोग जो बाढ़ की वजह से अपना घर बार छोड़ कर बाँध पर शरण लिए हुए हैं इसी चिंता में घुले जा रहे हैं – जैसे-तैसे थोड़े से चारा का इन्तज़ाम तो कर लिया लेकिन अब वो भी ख़त्म हो गया. ऐसे में जब उनसे चारा के बारे में सवाल पूछा तो पुरुष हो या महिला अपना ग़ुस्सा नहीं रोक पाए.

ज़ाहिर है नाराज़गी स्वाभाविक है लेकिन सबसे बड़ा सवाल तो सरकार पर खड़ा होता है – आख़िर कैसा इंतजाम किया है सरकार ने? इनकी नाराज़गी अधिकारी से लेकर नेताओं तक है.