नोटबंदी : अब खुलने लगी है काली कमाई की पोल

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पटना: देश में नोटबंदी की घोषणा के बाद से काली कमाई के कुछ बड़े खिलाड़ी बौखला कर अपना धन सफेद करने की जुगत में लग गए है। बीते कुछ दिनों से आयकर विभाग और इडी की टीमों के सर्वे और छापों से अकूत काली कमाई के कई चौंकानेवाले खुलासे हुए हैं। कहीं कोई अदना अधिकारी भी करोड़ों की संपत्ति का मालिक निकला, तो कहीं कालाधन सफेद करने के लिए जनधन खातों के दुरुपयोग या सोना में लाखों के निवेश की बात सामने आयी है।

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पूर्णिया सदर प्रखंड में तैनात प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी ब्रजेश कुमार सिंह के तीन ठिकानों पर निगरानी ब्यूरो की विशेष टीम ने छापेमारी की। आय से अधिक संपत्ति के मामले में की गयी इस कार्रवाई में निगरानी ने उनके तीन ठिकानों पूर्णिया स्थित स्थानीय आवास, कार्यालय और फारबिसगंज स्थित उनके पैतृक आवास की गहन तलाशी की गयी।

इस दौरान उनके पैतृक आवास से 17 स्थानों पर जमीन के प्लॉट संबंधित कागजात, करीब 18 बैंक पासबुक, एक लॉकर के अलावा 11 लाख से ज्यादा मूल्य के सोने-चांदी के गहने बरामद किये गये हैं. पूर्णिया स्थित उनके स्थानीय आवास से तलाशी के दौरान 70 हजार रुपये कैश के अलावा कई स्थानों पर निवेश के कागजात बरामद किये गये हैं. सभी कैश 500 और हजार रुपये के पुराने नोटों के रूप में हैं. यहां वह किराये के मकान में रहते हैं. कार्यालय की जांच के दौरान कुछ खास कागजात नहीं मिले, लेकिन दो-तीन बैंकों के पासबुक मिले हैं.

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बीएमओ सभी 18 पासबुकों में लाखों रुपये जमा हैं. इसके अलावा फारबिसगंज के एक सरकारी बैंक में लॉकर का भी पता चला है. निगरानी ने इसके सभी पासबुक और लॉकर को फिलहाल फ्रीज कर दिया है. लॉकर को खोलने के बाद ही यह पता चल पायेगा कि इसमें क्या-क्या बंद है। जमीन के कागजातों की शुरुआती जांच में यह बात सामने आयी है कि इन्होंने तीन-चार जमीन की रजिस्ट्री नोटबंदी की घोषणा होने के बाद करवायी है। आठ नवंबर के बाद की जमीन रजिस्ट्री के कागजात मिले हैं। निगरानी मामले की जांच में जुटी है।

आरा में सितारा देवी के जन धन खाते में जमा हुए 40 लाख

आरा के नेहरू नगर मोहल्ला की रहने वाली सितारा देवी के बैंक खाते में सात दिनों के अंदर ही 40 लाख रुपये जमा हो गये। जन-धन योजना के तहत खोले गये इस बैंक खाते में ये रुपये कई बार में कैश के रूप में जमा किये गये हैं। आरा शहर के एक सरकारी बैंक में इनका यह बैंक खाता है।

जन-धन योजना के तहत खोले गये सभी बैंक खातों की जांच के दौरान जब आयकर विभाग को इनके खाते पर नजर पड़ी, तो विभाग ने इस महिला की पति अजय यादव ऊर्फ छट्ठू यादव से इतने रुपये का स्रोत पूछा। उन्होंने बताया कि दूध बेचकर सभी 40 लाख रुपये जमा किये हैं। जिसे बैंक खातों में जमा कराया है।

हालांकि वह इसके आगे पैसे के स्रोत के बारे में कोई सही जानकारी नहीं दे सका। इस कारण उसका बैंक एकाउंट फिलहाल सील कर दिया गया है। आयकर विभाग की टीम इस मामले में आगे की तहकीकात कर रही है।

बड़ी राशि वाले जन-धन बैंक खाते रडार पर

नोटबंदी के बाद जिन लोगों के जन-धन बैंक खातों में दो लाख या इससे ज्यादा की कोई भी बड़ी राशि जमा की गयी है। उनकी जांच आयकर विभाग कर रहा है। ये खातें आयकर विभाग के रडार पर हैं।

राज्य में जन-धन योजना के तहत करीब दो करोड़ 60 लाख बैंक खाते खोले गये थे। इसमें 40 फीसदी एकाउंट ऐसे थे। जिनमें खुलने के बाद कभी कोई ट्रांजेक्शन ही नहीं हुए हैं। नोटबंदी के बाद इनमें से अधिकतर एकाउंट में अचानक लाखों रुपये जमा होना शुरू हो गये हैं। ऐसे बैंक खाते आयकर की रडार पर हैं।

पटना के अलंकार ज्वेलर्स

राजधानी पटना के बोरिंग रोड चौराहे पर स्थित जाने-माने स्वर्ण व्यवसायी अलंकार ज्वेलर्स के यहां आयकर की टीम ने एक दिसंबर को छापेमारी की थी। देर रात तक चली इस जांच में कई अहम खुलासे हुए हैं। यह पाया गया कि नोटबंदी की घोषणा के बाद 8 और 9 नवंबर को अपने-अपने ब्लैक मनी को व्हाइट करने के चक्कर में करीब 100 से ज्यादा लोगों ने दो लाख रुपये से ज्यादा का सोना खरीदा है। तकरीबन सभी खरीदारी पुराने नोट में ही की गयी है।

इसके अलावा आयकर विभाग ने शहर के कई दूसरे स्वर्ण व्यवसायियों का डाटा एकत्र किया है। जिनकी अभी जांच चल रही है। इनके यहां भी दो लाख से ज्यादा खरीद करने वाले लोगों की पहचान की जा रही है। जल्द ही इन व्यवसायियों के यहां भी सर्च किया जाएगा। गौरतलब है कि नोटबंदी के बाद ब्लैक को व्हाइट करने की जुगत में सोना की खरीदारी सबसे ज्यादा हुई है। इसमें अब तक शहर के दो बड़े स्वर्ण व्यवसायियों के यहां आयकर की छापेमारी हो चुकी है।

नए नोट से करें मंदिर में दान

वहीं राज्य में मौजूद सभी मंदिरों, मठों, ट्रस्टों या अन्य किसी धार्मिक संस्थानों में 500 और हजार रुपये के पुराने नोटों में चढ़ावा या दान नहीं लिया जाएगा। इस मामले को लेकर आयकर विभाग के निदेशक अशोक कुमार सिन्हा ने राज्य के मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह को एक महत्वपूर्ण पत्र शुक्रवार को लिखा है।

इस पत्र में कहा गया है कि राज्य में जितने भी मंदिर या ऐसे अन्य धार्मिक संस्थान हैं, उन पर जल्द से जल्द यह सूचना टांगी जाये कि लोग विमुद्रीकरण के बाद बंद हुए 500 और हजार रुपये के पुराने नोटों में किसी तरह का दान या चढ़ावा नहीं चढ़ायें। लोगों से नए नोटों में ही दान या चढ़ावा चढ़ाने का अनुरोध करने के लिए कहा गया है।

इस पत्र के मद्देनजर राज्य सरकार जल्द ही इससे संबंधित आदेश जारी करने जा रही है। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि इस तरह का आदेश पहले महाराष्ट्र सरकार जारी कर चुकी है। जिसका सहारा भी लेकर राज्य सरकार अपने यहां नियम और कायदे तय कर सकती है। अगर किसी मंदिर या मठ के दान पात्र में कोई 500 या हजार रुपये के पुराने नोट बिना बताए चढ़ाकर चला भी जाता है। तो इस नोट के निकलने पर इसकी वीडियोग्राफी करवायी जाए और इनका पूरा विवरण लिखकर ही बैंक के खाते में जमा करें।