पिछले कुछ सालों में बिहार में रेलवे का हुआ विकास, यात्रियों से जुड़ी महत्वपूर्ण परियोजनाएं हुई पूरी

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HAJIPUR: पूर्वी मध्य रेल के मुख्य जनसंपर्क पदाधिकारी राजेश कुमार ने रविवार को बिहार राज्य में नई लाइनों के निर्माण,दोहरीकरण, विद्युतीकरण और आमान परिवर्तन जैसे रेल अवसंरचना के विकास से जुड़े कार्यों में पिछले कुछ वर्षों में तेजी आई है. विशेषकर साल 2014 से 2020 के मध्य निधि की पर्याप्त उपलब्धता के कारण इसमें काफी गति आई जिसके फलस्वप यात्री सुविधा से जुड़ी कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं पूरी की जा सकीं.

यही नहीं, शेष परियोजनाएं तय समय-सीमा के भीतर पूरी हो सकें, इस दिशा में भी तीव्र गति से कार्य जारी है. मालूम हो कि आंशिक रूप से कुछ क्षेत्रों को छोड़कर बिहार राज्य का अधिकांश भाग पूर्व मध्य रेल क्षेत्राधिकार में आता है. साल 2014-15 से 2019-20 के मध्य नई लाइन, दोहरीकरण और आमान परिवर्तन से जुड़े 775 किलोमीटर लंबी रेल परियोजनाओं का कार्य पूरा किया गया. अकेले 2019-20 में 203 किलोमीटर नई लाइन, दोहरीकरण तथा आमान परिवर्तन का कार्य पूरा हुआ.

नई लाइन परियोजनाओं पर कार्य करते हुए जमालपुर-मुंगेर (08 किमी), दनियांवा-बिहारशरीफ (38 किमी), रेल-सह-सड़क पुल पटना एवं मुंगेर (49 किमी), चंदन-बांका (40 किमी), बिरौल-हरनगर (8 किमी), महाराजगंज-मशरख (36 किमी), वैशाली-घोसवर (30 किमी), इस्लामपुर-नटेसर (21 किमी) सहित अन्य नई रेल लाइन परियोजनाओं को अंतिम रूप दिया गया ।

इसी तरह दोहरीकरण परियोजना में मुख्य रूप से हाजीपुर-सोनपुर (5.5 किमी), हाजीपुर-घोसवर (5.5 किमी), पीरपैंती-कंहलगांव (21 किमी), हाजीपुर-रामदयालुनगर (मुजफ्फरपुर) (47 किमी), बाढ़-बख्तियारपुर तीसरी लाइन (14 किमी) सहित अन्य दोहरीकरण परियोजनाओं का कार्य पूरा किया गया. दोहरीकरण का कार्य पूरा हो जाने से समय पालन में उल्लेखनीय सुधार हुआ है.

आमान परिवर्तन कार्य को पूरा करते हुए 143 किलोमीटर लंबे मानसी-सहरसा (सहरसा-दौरभ-मधेपुरा-पूर्णिया सहित) मुख्य परियोजना पर कार्य करते हुए प्रथम चरण में 20 किलोमीटर लंबे मुरलीगंज-बनमंखी तथा द्वितीय चरण में 37 किलोमीटर लंबे बनमंखी-पूर्णिया आमन परिवर्तन का कार्य पूर्ण हुआ. इसी तरह छपरा-मशरख (42 किमी), मशरख-थावे (64 किमी), छपरा-खैरा रेलखंड का आमान परिवर्तन पूरा किया गया. नेपाल से सटे रक्सौल- नरकटियागंज (42 किमी), सहरसा-गढबड़ुआरी (16 किमी), सकरी-मंडन मिश्रा हॉल्ट (11 किमी), बनमंखी- बड़हाकोठी (16 किमी) रेलखंड को छोटी लाइन से बड़ी लाइन में परिवर्तित किया गया.

इसी क्रम में लगभग 207 किलोमीटर लंबे सकरी-निर्मली एवं झंझारपुर- लौकहाबाजार तथा सहरसा- फारबिसगंज आमान परिवर्तन परियोजना के तहत मंडन मिश्रा हॉल्ट-झंझारपुर (16 किमी), गढ़बड़ुआरी-सुपौल (11 किमी), सुपौल-सरायगढ़ (25 किमी) तथा झंझारपुर-तमुरिया (09 किमी) का आमान परिवर्तन कार्य पूरा किया गया.